
परभणी:
वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी के उद्यान विज्ञान विभाग द्वारा केंद्र सरकार प्रायोजित एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH – Mission for Integrated Development of Horticulture) के अंतर्गत संचालित मसाला एवं सुगंधित फसलों के विकास कार्यक्रम की समीक्षा हेतु दिनांक 22 जुलाई 2026 को एक बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) इंद्र मणि की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
अध्यक्षीय मार्गदर्शन में माननीय कुलपति ने मसाला एवं सुगंधित फसलों का उत्पादन बढ़ाने हेतु आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता, अनुसंधान एवं विस्तार के मध्य समन्वय को अधिक सुदृढ़ करने तथा मराठवाड़ा के किसानों की आय वृद्धि हेतु परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन का नियोजन करने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने इस परियोजना को समूह आधारित दृष्टिकोण (Cluster Approach) से प्रभावी रूप से संचालित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अनुसंधान निदेशक डॉ. भगवान आसेवार, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. राकेश अहिरे तथा परियोजना के मुख्य अन्वेषक एवं उद्यान विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ खंदारे की प्रमुख उपस्थिति रही।
प्रास्ताविक संबोधन में डॉ. विश्वनाथ खंदारे ने कार्यक्रम के उद्देश्यों, विभिन्न केंद्रों पर इसके क्रियान्वयन, उत्कृष्ट रोपण सामग्री के निर्माण, मसाला एवं सुगंधित फसलों की उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकी के प्रसार तथा मराठवाड़ा में इन फसलों के क्षेत्रफल विस्तार हेतु चलाए जा रहे उपक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत मसाला एवं सुगंधित फसलों की गुणवत्तापूर्ण पौधशाला (नर्सरी) सामग्री उपलब्ध कराना, किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाना और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करना मुख्य उद्देश्य है।
इस अवसर पर विभाग के अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे। बैठक में परियोजना के विभिन्न घटकों की समीक्षा की गई। साथ ही प्रत्यक्षीकरण (प्रदर्शन), प्रशिक्षण कार्यक्रम, पौधशाला विकास, कृषक मार्गदर्शन एवं विस्तार गतिविधियों को और अधिक प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने पर गहन चर्चा हुई।
यह परियोजना विश्वविद्यालय के उद्यान विज्ञान विभाग सहित विभिन्न अनुसंधान केंद्रों, केंद्रीय पौधशाला, कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से संचालित की जा रही है, जो मसाला एवं सुगंधित फसलों के उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री तथा उन्नत प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही है।