
- निज़ाम के जुल्मी शासन से मुक्ति के लिए स्वामी रामानंद तीर्थ का योगदान अतुलनीय- प्रधानाध्यापक अरुण बोराडे
परभणी:
स्थानीय नानलपेठ स्थित बाल विद्यामंदिर हाईस्कूल में 17 सितंबर को ‘मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस’ उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर संस्था के सदस्य एम. जी. विहिटकर के कर-कमलों द्वारा मुख्य ध्वजारोहण संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण बोराडे, उप- प्रधानाध्यापक रामदास तुम्मेवार, पर्यवेक्षक सीमा बोके, बलीराम कोपरटकर, वरिष्ठ शिक्षक प्रवीण सोनोने और प्राथमिक विद्यालय की मुख्याध्यापिका सुनीता जाधव प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
समारोह के आरंभ में मुख्याध्यापक अरुण बोराडे ने प्रास्ताविक भाषण देते हुए सभी को मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस की शुभकामनाएं दीं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा–
”हैदराबाद रियासत निज़ाम के दमनकारी और अन्यायी शासन के अधीन थी, जिसका आम जनता ने कड़ा विरोध किया। निज़ाम रियासत का भारत संघ में विलय करने को तैयार नहीं था, जिससे देश की अखंडता अधूरी थी। जनता पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ स्वामी रामानंद तीर्थ के नेतृत्व में ऐतिहासिक जन-आंदोलन खड़ा हुआ। अंततः ‘ऑपरेशन पोलो’ के बाद 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद रियासत का भारत में विलय हुआ और मराठवाड़ा सहित कर्नाटक व तेलंगाना के क्षेत्र निज़ाम के चंगुल से मुक्त होकर अखंड भारत का अभिन्न अंग बने। इस संघर्ष में प्राणों की आहुति देने वाले अमर हुतात्माओं और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हम सभी का परम कर्तव्य है।”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम. जी. विहिटकर ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस की बधाई दी। उन्होंने ‘मराठवाड़ा गौरव गीत’ की ओजस्वी प्रस्तुति देकर समां बांध दिया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के माहौल में सराबोर हो गया।
समारोह के दौरान अतिथियों के हाथों विद्यालय की पत्रिका ‘आमची शाळा’ के नवीन अंक का विमोचन किया गया। साथ ही विभिन्न शैक्षणिक व सह-पाठ्यक्रम प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन सुभाष ढगे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. गजानन जुमडे द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और अभिभावक मौजूद रहे।