
श्री शिवाजी महाविद्यालय में धूमधाम से मना ‘हिंदी दिवस’
परभणी (१५): बीते कई वर्षों में विज्ञान और तकनीक के बल पर मानव ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इस विकास यात्रा में भाषा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में बहुसंख्यक आबादी द्वारा बोली जाने वाली हिंदी भाषा नए परिवर्तनों को आत्मसात करते हुए ज्ञान और विज्ञान के क्षितिजों का विस्तार कर रही है। यह विचार प्रो. डॉ. मुंजाजी इंगोले ने व्यक्त किए।
स्थानीय श्री शिवाजी महाविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से मंगलवार (१५ तारीख) को ‘हिंदी दिवस’ समारोह का आयोजन किया गया था। वे इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपप्राचार्य डॉ. रोहिदास नितोंडे ने की, जबकि मंच पर विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एल. राठौड़, डॉ. संजय जाधव, डॉ. जयंत बोबडे, डॉ. सुधीर इंगले तथा प्रा. अरुण राठौड़ प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
आगे बोलते हुए डॉ. इंगोले ने कहा कि हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जिसका उत्सव पूरे उत्साह और आनंद के साथ मनाया जाता है। देश के संविधान द्वारा त्रिभाषा सूत्र स्वीकार किए जाने के बाद हिंदी ने राजभाषा और संपर्क भाषा के रूप में विशिष्ट गौरव हासिल किया है। जाति, धर्म और पंथ की सीमाओं से परे जाकर हिंदी ने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। सामान्य जन के सरोकारों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के कारण ही हिंदी आज सच्ची जनभाषा बन चुकी है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में उपप्राचार्य डॉ. रोहिदास नितोंडे ने कहा कि विद्यार्थियों को बहुभाषी होना चाहिए, जिससे व्यक्तित्व में बहुआयामी निखार आता है। मराठी के साथ-साथ हिंदी भाषा को सीखना, पढ़ना और लिखना समय की मांग है। तेजी से बदलते दौर और वैज्ञानिक प्रगति को देखते हुए विभिन्न भाषाओं पर अधिकार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद आवश्यक है।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पूजन के साथ हुआ।
समारोह की प्रस्ताविकी विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एल. राठौड़ ने रखी, जबकि मंच संचालन व आभार प्रदर्शन प्रा. राजेंद्र वायाळ ने किया। आयोजन को सफल बनाने में शेख शाहेद, बळीराम जवादे, विशाल लिंगायत सहित अन्य सहयोगियों ने सक्रिय योगदान दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
