
परभणी: मिट्टी से उपजी प्रतिभा जब कूची की ताकत से वैश्विक कैनवास पर उतरती है, तो उस कला को हर कोई नतमस्तक होकर सलाम करता है। ऐसा ही एक गौरवपूर्ण मुकाम परभणी के सुपुत्र और सबके चहेते ‘काका’ यानी चित्रकार सुशीलकुमार जी ने हासिल किया है।
उनकी बहुप्रतीक्षित चौथी अंतरराष्ट्रीय एकल चित्र प्रदर्शनी का आयोजन मुंबई के दिल कहे जाने वाले और विश्वविख्यात ‘काला घोड़ा’ स्थित आर्टिस्ट सेंटर (कलाकार केंद्र) में किया गया है। यह प्रदर्शनी 22 से 28 सितंबर 2026 तक रोजाना सुबह 11:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी।
प्रकृति, प्रकाश-छाया और रंगों का अलौकिक संगम
काका की इस प्रदर्शनी की मुख्य विशेषता उनकी यथार्थवादी (रियलिस्टिक) शैली, प्रकृति के मनमोहक दृश्य और ऐक्रेलिक रंगों का सधा हुआ प्रयोग है। उनके चित्र केवल आंखों से दिखने वाली दुनिया को ही नहीं दर्शाते, बल्कि उस पल के गहरे भाव, तालमेल और उसकी शाश्वत पहचान को कैनवास पर जीवंत कर देते हैं। यही उनकी कला की सबसे बड़ी पूंजी है।
प्रदर्शनी के संदर्भ में प्रख्यात चित्रकार काका सुशीलकुमार जी ने कहा, “मुझे अपने चित्रों के जरिए केवल दृश्यमान संसार को नहीं दिखाना है, बल्कि उसके अंतर्भाव, संवाद और उसके चरित्र को एक शाश्वत रूप में सहेजना है। यही मेरी कला की आत्मा है।”
ताज और नेहरू सेंटर के बाद चौथा बड़ा पड़ाव
इससे पहले होटल ताज और वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में आयोजित उनकी तीन अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों ने कला प्रेमियों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। ‘गेटवे ऑफ इंडिया’, समुद्र पर ढलती सुनहरी शाम और मुंबई की धड़कनों को कैनवास पर उतारने वाली उनकी कृतियां देश-विदेश के कला संग्रहकर्ताओं के बीच खासी लोकप्रिय रही हैं। उसी अपार सफलता के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए यह चौथी प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है।
अपनी कूची से प्रकृति को कैनवास पर हूबहू उतार देने वाला यह फनकार देश की आर्थिक राजधानी में परभणी का मान बढ़ा रहा है। यह उपलब्धि केवल एक कलाकार की नहीं, बल्कि कला के प्रति पूरे परभणी की लगन और जज्बे की मिसाल है।
चित्रकार काका सुशीलकुमार ने सभी कला प्रेमियों और रसिकों को इस कला-यात्रा का साक्षी बनने और चित्रों का प्रत्यक्ष आनंद लेने के लिए सादर आमंत्रित किया है।