राज्यशिक्षा

कैकेई ने कुसंगति के प्रभाव में आकर श्री राम के राज्याभिषेक में उत्पन्न किया विघ्न-

मानस महारथी पं.निर्मलकुमार शुक्ल


परभणी (विशेष संवाददाता):

को न कुसंगति पाइ नसाई। रहइ न नीच मते चतुराई।।” अर्थात संसार में ऐसा कौन है जो कुसंगति में पड़कर नष्ट न हुआ हो? मनुष्य के जीवन पर संगति का अत्यधिक गहरा प्रभाव पड़ता है। सत्संग जहाँ एक साधारण या दानवी प्रवृत्ति के व्यक्ति को भी देवतुल्य बना देता है, वहीं कुसंगति बड़े-बड़े सिद्ध पुरुषों और ज्ञानियों के विवेक को हरकर उन्हें पतन के गर्त में ढकेल देती है।

​स्थानीय स्टेशन रोड स्थित पेड़ा हनुमान मंदिर में आयोजित नौदिवसीय मानस कथा के चतुर्थ दिवस पर श्रोताओं को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध मानस महारथी पंडित निर्मल कुमार शुक्ल ने उक्त ओजस्वी विचार व्यक्त किए। इस वर्ष कथा में वाल्मीकि रामायण के अंतर्गत ‘अयोध्या कांड’ की अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण व्याख्या की जा रही है।

मंथरा के षड्यंत्र से बदला कैकेई का हृदय

प्रसंग की विस्तृत व्याख्या करते हुए पं. शुक्ल ने कहा कि महाराजा दशरथ ने अयोध्या में श्री राम के राज्याभिषेक की समस्त तैयारियाँ पूर्ण कर ली थीं। संपूर्ण नगर को दुल्हन की भाँति सजाया गया था तथा देश-देशांतर से राजा-महाराजा एवं गणमान्य जन एकत्र हो चुके थे। परंतु संध्या काल में जब कैकेई की दासी मंथरा ने नगर का उत्सव देखा और उसे राम के युवराज बनने का समाचार मिला, तो वह ईर्ष्या की अग्नि में जल उठी।

​मंथरा ने रानी कैकेई के कक्ष में जाकर कुटिल कुचक्र रचा। उसने राजनीति का भय दिखाकर कैकेई के मन में यह आशंका भर दी कि राम के राजा बनते ही भरत का जीवन संकट में पड़ जाएगा। मंथरा के कुसंग और कुटिल तर्कों के जाल में फँसकर रानी कैकेई का राम के प्रति अगाध वात्सल्य और विवेक तिरोहित हो गया। परिणामस्वरूप, कैकेई ने श्री राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजसिंहासन माँगकर पूरे संसार से रामराज्य का तात्कालिक सुख छीन लिया।

जीवन में संगति के चयन का संदेश

कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को उपदेश देते हुए कहा कि संगति के प्रभाव से तोता, मैना और पशु-पक्षी तक अपनी भाषा और स्वभाव बदल लेते हैं, तो फिर मानव चेतना का प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में कुसंगति से सर्वथा दूर रहकर केवल सत्संग, ज्ञानी पुरुषों के मार्गदर्शन और विवेक का आश्रय लेना चाहिए, ताकि जीवन में कभी अनर्थ की स्थिति उत्पन्न न हो।

10 अगस्त तक प्रवाहित होगी कथा गंगा-

उपलब्धी का भक्तजन उठाए लाभ-

कथागंगा मे लगाए डुबकी-

कथा के इस अवसर पर नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मंदिर व्यवस्थापक पंडित श्री राम जी तिवारी, योगेश तिवारी, निलेश तिवारी, ठाकुर शिवेंद्र सिंह, अधिवक्ता अशोक सोनी, रमेश शर्मा, रामकिशन भूतड़ा एवं महेश सोनी ने समस्त धर्मानुरागी जनता से अपील की है कि वे 10 अगस्त तक प्रतिदिन अपराह्न 3:00 से 5:00 बजे तक आयोजित इस ज्ञानयज्ञ में पधारकर कथामृत का पान करें और पुण्य के भागी बनें।

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