उज्जैन: पवित्र श्रावण मास के उपलक्ष्य में महाकालेश्वर भगवान की महिमा का गुणगान मानस महारथी ने शिवस्तुति करते हुए विशेष रचना प्रस्तुत की है.
श्लोकार्थ एवं विवरण:
- साम्राज्य एवं भस्म आरती: जिनका दिव्य साम्राज्य पुण्यतोया शिप्रा नदी के पावन तट पर प्रतिष्ठित है तथा जिनकी प्रात:काल भस्म से युक्त भव्य आरती संपन्न होती है।
- मोक्षदायिनी अवंतिका व पावन शिप्रा: जिनके चरण-स्पर्श मात्र से मोक्षदायिनी उज्जयिनी नगरी सदैव गौरवान्वित रहती है और पावन शिप्रा नदी स्वयं को धन्य मानती है।
- मृत्युभय नाशक व संतों के आनंददाता: जो मृत्यु के समस्त भय का नाश करने वाले हैं, साक्षात काल को भी भयभीत करने वाले हैं तथा संत-वृंद को सदैव असीम आनंद व उल्लास प्रदान करते हैं।
- त्रिलोकाधिपति महाकाल: जो स्वर्ग, पाताल और भूलोक—तीनों लोकों के परम शासक हैं, उन उज्जयिनी के अधिपति भगवान शंभु महाकालेश्वर को कोटिशः वंदन है।
यह स्तुति क्रम संपूर्ण श्रावण मास निरंतर जारी रहेगा। इस ओर श्रोतागण ध्यान दे. 
