परभणी (प्रतिनिधि):
गत वर्ष पाथरी विधानसभा क्षेत्र सहित गंगाखेड़ तहसील के गोदावरी तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं के निवारण हेतु आज सहायता एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने मंत्रालय (मुंबई) में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया। बैठक में उन्होंने जिलाधिकारी परभणी को इस संबंध में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि शीतकालीन सत्र 2026 के दौरान विधायक राजेश विटेकर तथा विधायक रत्नाकर गुट्टे सहित अन्य विधायकों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर ध्यानाकर्षण सूचना प्रस्तुत की थी।
ध्यानाकर्षण सूचना में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया गया था:
- 117 गांवों के विस्थापन की आवश्यकता: परभणी जिले में गोदावरी नदी तथा अन्य सहायक नदियों व नालों के तटीय गांवों में बाढ़ का गंभीर संकट उत्पन्न होने के कारण, जिले के लगभग 117 गांवों के पुनर्वास की नितांत आवश्यकता उत्पन्न हो गई है।
- विगत वर्ष का संकट: जिले में जुलाई से सितंबर 2025 के मध्य हुई अतिवृष्टि एवं भीषण बाढ़ के कारण तटीय गांवों में पानी भर गया था, जिससे भारी जनहानि की आशंका बन गई थी। अधिकांश गांवों में नागरिकों को नौकाओं के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर उनके प्राणों की रक्षा करनी पड़ी थी।
- प्रभावित गांवों की संख्या: पाथरी तहसील के 20, मानवत के 06, सोनपेठ के 13, गंगाखेड़ के 20, पालम के 21, पूर्णा के 22 और सेलू के 12 गांवों के नागरिक उस समय अत्यंत भयभीत होकर बाढ़ की स्थिति सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट चुका था। यदि बाढ़ की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती, तो प्रशासन के लिए इतने बड़े पैमाने पर बचाव कार्य (रेस्क्यू ऑपरेशन) चलाना संभव नहीं था, क्योंकि प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं थे। प्रशासन की विवशता को देखते हुए ग्रामीणों का जीवन संकट में पड़ गया था।
विधायक राजेश विटेकर एवं विधायक रत्नाकरराव गुट्टे ने ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान यह मत व्यक्त किया था कि इन गांवों का सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास करने, नदी तटों पर बाढ़ सुरक्षा दीवारों का निर्माण करने, ‘नीली रेखा’ (ब्लू लाइन) व ‘लाल रेखा’ (रेड लाइन) का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने तथा पूर्व में पुनर्वासित किए गए पुराने गांवों में मूलभूत अवसंरचनात्मक (इंफ्रास्ट्रक्चर) सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
इसी पृष्ठभूमि में सहायता एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने आज मंत्रालय में विशेष बैठक बुलाई। बैठक में गंगाखेड़ विधानसभा क्षेत्र के संदर्भ में विधायक रत्नाकरराव गुट्टे ने तथा पाथरी विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं के विषय में जिला परिषद के उपाध्यक्ष एडवोकेट श्रीकांत विटेकर ने मंत्री महोदय के समक्ष विभिन्न मांगें प्रस्तुत कीं। इस बैठक में ऑनलाइन माध्यम से प्रभारी जिलाधिकारी नितीशा माथुर, निवासी उप-जिलाधिकारी अनुराधा ढालकरी, अपर जिलाधिकारी शोभा राउत, जिला पुनर्वास अधिकारी प्रतिभा गोरे आदि प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में मंत्री महोदय द्वारा लिए गए मुख्य निर्णय:
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- 5 करोड़ का वित्तीय आवंटन: मंत्री पाटिल ने कहा कि गोदावरी नदी के तट पर स्थित गांवों को बाढ़ का निरंतर खतरा बना रहता है। अतः उनके ‘नीली रेखा’ और ‘लाल रेखा’ के सर्वेक्षण हेतु 5 करोड़ रुपये की निधि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन गांवों का पूर्ण रूप से अथवा आंशिक रूप से पुनर्वास किया जाना आवश्यक है।
- सड़कों व पुलों का पुनर्निर्माण: बाढ़ के कारण प्रभावित गांवों को जोड़ने वाली सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। अतः इन पुलों और सड़कों की ऊंचाई बढ़ाकर उनका नए सिरे से निर्माण किया जाएगा। मंत्री महोदय ने जिलाधिकारी परभणी को इसके नवीन प्रस्ताव तैयार करने के आदेश दिए हैं।
- मूलभूत सुविधाओं की आपूर्ति: जिन गांवों का पूर्व में पुनर्वास किया जा चुका है, किंतु वहां अब तक भौतिक व नागरिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, उन गांवों में तत्काल ये सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए भी प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
”गत वर्ष बाढ़ की स्थिति के दौरान मैंने स्वयं परभणी जिले का दौरा कर प्रत्यक्ष निरीक्षण किया था। पाथरी और गंगाखेड़ विधानसभा क्षेत्रों के गांवों की वास्तविक स्थिति से मैं भली-भांति अवगत हूँ। भविष्य में ऐसी संकटपूर्ण स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए शासन द्वारा ये दूरगामी उपाययोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।”
— मकरंद पाटिल, सहायता एवं पुनर्वास मंत्री
