
परभणी – हमेशा अपने सामाजिक कार्यों से एक मिसाल कायम करने वाले यहाँ के श्री शिवाजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बालासाहेब जाधव ने अपना जन्मदिन बेहद सादड़े तरीके से मनाते हुए, बीड जिले के ढेकनमोह स्थित ‘पसायदान सेवा हक्काचं घर’ प्रकल्प को 61 हजार रुपये की नकद सहायता प्रदान कर अनाथों को जीवन जीने का नया संबल दिया है।
प्राचार्य डॉ. बालासाहेब जाधव हर साल अपना जन्मदिन सामाजिक कार्यों के जरिए ही मनाते हैं। इस वर्ष शनिवार 24 अक्टूबर
को उन्होंने ढेकनमोह ,जिला बीड स्थित पसायदान सेवा प्रकल्प में पहुँचकर अनाथ बच्चों के बीच सादगी से अपना जन्मदिन मनाया। अपनी उम्र के 61 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उन्होंने ६१ हजार रुपये नकद देकर एक सामाजिक आदर्श प्रस्तुत किया है। इस सेवा प्रकल्प में कुल 75 लड़के-लड़कियां रहते हैं।
इस अवसर पर प्रा. संजय ढवले, प्रा. आबासाहेब सावंत और सामाजिक कार्यकर्ता अरुण कदम ने डॉ. जाधव के जन्मदिन के अवसर पर बच्चों को चप्पलें, स्वादिष्ट भोजन और तीन महीने का राशन सामग्री प्रदान की। इस दौरान श्रीमती जया जाधव, अनिमेष जाधव, डॉ. श्वेताली पाटिल, प्रदीप पाटिल, सृष्टि जाधव, उपप्राचार्य डॉ. रोहिदास नितोंडे, प्रकल्प संचालक गोवर्धन दराडे, बप्पासाहेब डावकर, डॉ. जयंत बोबडे, रुग्णसेवक माऊली वाघमारे, प्रा. नीतिन चौधरी, प्रा. प्रवीण कोल्हे, डॉ. नारायण कणसे, डॉ. बापूसाहेब भोसले, प्रा. मयूर टाक, मधुकर देशमुख, माऊली लांडगे, लक्ष्मण सोगे, सैयद सादिक, अमित बीडला और तुकाराम पवार आदि उपस्थित थे।
इस मौके पर बोलते हुए प्राचार्य डॉ. बालासाहेब जाधव ने कहा कि पसायदान जैसी संस्थाओं के माध्यम से अनाथों को संबल प्रदान करने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और पुण्य का काम है। समाज के वंचितों और अनाथों के माता-पिता बनकर दराडे दंपत्ति ने समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। पसायदान जैसी संस्था इन बच्चों का पालन-पोषण करने के साथ-साथ उन्हें अच्छी शिक्षा और संस्कार देने का भी कार्य कर रही है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि समाज के नागरिकों को अपने जन्मदिन धूमधाम से न मनाकर ऐसी संस्थाओं को मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए, जिससे उपेक्षित और वंचित वर्गों को वास्तविक सहायता मिल सके।
कार्यक्रम की प्रस्तावना और संचालन बप्पासाहेब डावकर ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन संचालक गोवर्धन दराडे ने माना। कार्यक्रम के अंत में सभी ने बच्चों के साथ मिलकर भोजन किया। बच्चों के चेहरों पर बिखरी मुस्कान देखकर उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने गहरी संतुष्टि व्यक्त की।
