
- राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने परभणी जिलाधिकारी को दिए निर्देश
- 31 अक्टूबर तक निजी कुओं और बोरवेल के पुनर्भरण का आह्वान
- जियो-टैग तस्वीरों के साथ अनुपालन रिपोर्ट सौंपने के आदेश
- शासकीय कार्यालय परिसरों में ‘जलतारा’ सोक पिट बनाना अनिवार्य
परभणी:
जिले में संभावित जल संकट, गिरते भूजल स्तर और बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को गति देने के लिए एक विशेष जल संरक्षण अभियान शुरू किया गया है। राज्यमंत्री व पालक मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने परभणी के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि इस अभियान की शुरुआत शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से की जाए। साथ ही, सभी कार्यालय प्रमुखों को अपने कार्यालय परिसर में ‘जलतारा’ सोक पिट (शोष खड्डे) तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं। जल संरक्षण की दिशा में यह जिले का पहला चरण है, जिसके बाद अगले चरण में आम नागरिकों को भी इस मुहिम से जोड़ा जाएगा।
इस अभियान के तहत जिले के सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने निजी आवास, कृषि भूमि अथवा अन्य स्वामित्व वाले स्थानों पर स्थित बोरवेल, कुओं और अन्य जलस्रोतों के पुनर्भरण हेतु आवश्यक कदम उठाने होंगे। बारिश के पानी को रोकने और उसे जमीन में उतारने के लिए जल संरक्षण के कार्य 31 अक्टूबर 2026 तक पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन कार्यों पर रहेगा मुख्य जोर:
- वर्षा जल को एकत्र कर बोरवेल और कुओं का पुनर्भरण (रिचार्ज) करना।
- छतों से वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग)।
- भूजल पुनर्भरण के लिए सोक पिट और रिचार्ज पिट का निर्माण।
- ’जलतारा’ सोक पिट तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अन्य उपयुक्त जल संरक्षण उपाय।
जियो-टैगिंग और रिपोर्टिंग अनिवार्य:
किए गए सभी कार्यों का जियो-टैग तस्वीरों के साथ दस्तावेजीकरण करना अनिवार्य होगा। इसमें संबंधित अधिकारी-कर्मचारी का नाम, पद, कार्यालय, गांव, जलस्रोत का प्रकार और किए गए कार्य का पूरा ब्योरा शामिल होना चाहिए। इसके अलावा, सभी कार्यालय प्रमुखों या नोडल अधिकारियों को अपने-अपने विभागों के कार्यों की समीक्षा कर 1 नवंबर 2026 तक संकलित अनुपालन रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय को प्रस्तुत करनी होगी।
राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित कर उचित सराहना और प्रचार दिया जाएगा। सरकारी तंत्र की इस सक्रिय पहल से न केवल भूजल स्तर में सुधार होगा, बल्कि समाज में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जन-जागरूकता भी पैदा होगी।