राज्यशिक्षा

शिक्षकों को विद्यार्थियों में जिज्ञासा व आत्मविश्वास का संचार कर उनकी क्षमताओं का विकास करना चाहिए– डॉ. विवेक नावंदर

[विशेष प्रतिनिधि]

विद्यार्थी और शिक्षक का संबंध अटूट होता है। स्कूली जीवन से ही शिक्षकों को विद्यार्थियों में कठिन मार्गों पर चलने के लिए आत्मविश्वास का संचार करना चाहिए। कठिन परिश्रम के साथ-साथ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की भी महती आवश्यकता है। वर्तमान समय में विद्यार्थियों को कानूनी ज्ञान से भी अवगत कराया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों को पठन, लेखन, वाचन तथा श्रवण कौशल विकसित करना चाहिए, क्योंकि यही उनके व्यक्तित्व विकास की आधारशिला है। ये विचार बाल विद्यामंदिर शिक्षण संस्था द्वारा आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह के अवसर पर संस्था के सचिव डॉ. विवेक नावंदर ने व्यक्त किए।

​बाल विद्यामंदिर शिक्षा संस्था के तत्त्वावधान में मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के उपाध्यक्ष ॲड. विलास पोहंडुळकर ने की। इस अवसर पर मुख्य रूप से संस्था के सचिव डॉ. विवेक नावंदर, सह-सचिव ॲड. संजय देशपांडे, संस्था के सदस्य पवनकुमार झांजरी, मल्हार विहीटकर, डॉ. श्रीमती अनिता विवेक नावंदर, विद्यालय के प्रधानाचार्य अरुण बोराडे, उप-प्रधानाचार्य रामदास तुम्मेवार, पर्यवेक्षक प्रदीप रुघे, बळीराम कोपरटकर, श्रीमती सीमा बोके, बाल विद्याविहार के प्रमुख नितीन गोराडकर, बाल विद्या वर्धिनी के रमेश कापसे तथा बाल विद्यामंदिर प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती सुनिता जाधव एवं पर्यवेक्षक सुरेश रवंदळे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

​आगे संबोधित करते हुए डॉ. विवेक नावंदर ने कहा कि:

​”उत्कृष्ट नियोजन, प्रत्यक्ष क्रियान्वयन एवं सक्षम कार्यकुशलता के बल पर संस्था ने आज तक यह सफलता अर्जित की है। विद्यार्थियों को संस्था की इस सफलता के आलेख को और आगे ले जाना चाहिए तथा नवीन तकनीकों को आत्मसात करना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी अभिरुचि, मूलभूत पसंद एवं समायोजन क्षमता का परीक्षण करके ही सही दिशा का चयन करना चाहिए, जिससे आगामी जीवन में हताशा न हो। इस प्रक्रिया में शिक्षकों का मार्गदर्शन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है। विद्यार्थी, शिक्षक और संस्था के त्रिवेणी संगम से ही सफलता की प्राप्ति होती है।”

 

​कार्यक्रम के दौरान संस्था के सह-सचिव ॲड. संजय देशपांडे, संस्था सदस्य पवनकुमार झांजरी, मल्हार विहीटकर एवं डॉ. (श्रीमती) अनिता विवेक नावंदर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं।

​अध्यक्षीय संबोधन में संस्था के उपाध्यक्ष ॲड. विलास पोहंडुळकर ने कहा कि:

​”विद्यार्थियों के प्रथम गुरु उनके माता-पिता होते हैं। अतः विद्यार्थियों को माता-पिता में ईश्वर के दर्शन कर उनका आदर-सत्कार करना चाहिए। विद्यालय के शिक्षक भी विद्यार्थियों के लिए पूजनीय होने चाहिए, क्योंकि माता-पिता के पश्चात शिक्षक ही विद्यार्थियों को सुसंस्कृत बनाते हैं और ज्ञानवर्धन के साथ-साथ एक श्रेष्ठ मनुष्य का निर्माण करते हैं। विद्यार्थी भावी जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी सफलता प्राप्त कर लें, उन्हें सदैव विनम्र एवं ज़मीन से जुड़े रहना चाहिए, क्योंकि नम्रता ही व्यक्ति को महान बनाती है।”

 

​इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों के कर-कमलों द्वारा संस्था के दसवीं बोर्ड परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों सहित पूर्व प्राथमिक व माध्यमिक छात्रवृत्ति, एन.एम.एम.एस. छात्रवृत्ति, ओलंपियाड, होमी भाभा बाल वैज्ञानिक तथा सी.सी.आर.टी. छात्रवृत्ति जैसी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को पुष्पगुच्छ एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

​कार्यक्रम की प्रस्तावना विद्यालय के प्रधानाचार्य अरुण बोराडे ने प्रस्तुत की। अपने वक्तव्य में उन्होंने मेधावी छात्रों का अभिनंदन किया तथा संस्था की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विविध प्रतियोगी परीक्षाओं, खेलकूद, संगीत, चित्रकला एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में विद्यार्थियों की उपलब्धियों का विवरण साझा किया। साथ ही उन्होंने दसवीं कक्षा के परीक्षा परिणामों का वाचन भी किया।

​कार्यक्रम का मंच संचालन सुभाष ढगे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन उप-प्रधानाचार्य रामदास तुम्मेवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु विद्यालय एवं कनिष्ठ महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने अपना सराहनीय योगदान दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button