अधिकारियों की लापरवाही से जायकवाड़ी का पानी नालों में बहा-
खेतों में सूख रहीं फसलें; किसानों में भारी आक्रोश

विशेष संवाददाता पाथरी-*
जायकवाड़ी उपसंभाग के उप-अभियंता और संबंधित कर्मचारियों की कथित लापरवाही और मनमानी के चलते नहर क्रमांक 59 का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचने के बजाय नदी-नालों में व्यर्थ बह रहा है। जब खड़ी फसलों को एक-एक बूंद पानी की दरकार है, तब पानी की बर्बादी जारी है। किसानों का आरोप है कि अधिकारी स्थिति से पूरी तरह वाकिफ होने के बावजूद आंखें मूंदे बैठे हैं।
पाथरी तहसील में पिछले 45 दिनों से बारिश नहीं हुई है। हल्की मिट्टी वाली खरीफ की फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं, जबकि उपजाऊ काली मिट्टी में बोई गई सोयाबीन, कपास, अरहर और गन्ने की फसलें सूखने की कगार पर हैं। इस संकट को देखते हुए किसानों और जनप्रतिनिधियों ने बी-59 वितरिका में पानी छोड़ने की लगातार मांग की थी।
प्रशासन ने 29 अगस्त को पानी छोड़ा, लेकिन स्थिति तब बिगड़ी जब नहर के मुहाने पर बसे गांवों की वितरिकाएं पिछले 18 दिनों से खुली छोड़ दी गईं। नतीजा यह हुआ कि शुरुआत के खेतों में तीन से चार बार पानी भरने के बाद अतिरिक्त पानी नालों में बहने लगा।
देवनांद्रा से पानी छोड़े जाने के बाद रामपुरी, ढालेगांव, पोहेटाकली, तुरा, गुंज, कानसूर और लिंबा माइनर की वितरिकाएं 18-20 दिनों से लगातार खुली हैं। वहीं दूसरी ओर, नहर के अंतिम छोर पर स्थित वाघाला, फुलारवाड़ी, लिंबा, वझूर, वांगी और विटा जैसे गांवों के खेतों तक अब तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची है।
जब किसानों ने इस संबंध में अधिकारियों से संपर्क किया, तो पिछले एक महीने से केवल यही रटा-रटाया जवाब मिल रहा है कि “दो दिन में पानी छोड़ दिया जाएगा।” वहीं, मैदानी कर्मचारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि “यह पानी योजना में शामिल नहीं है, हम कुछ नहीं कर सकते।”
मुख्यालय से नदारद रहते हैं जिम्मेदार अधिकारी–
किसानों का कहना है कि उपसंभाग के उप-अभियंता अपने मुख्यालय में उपस्थित ही नहीं रहते। बताया जा रहा है कि उनके पास अन्य क्षेत्रों का अतिरिक्त प्रभार है, जिसके कारण वे केवल दूर बैठकर आदेश चला रहे हैं। नहर पर तैनात कर्मचारी भी मौके से नदारद रहते हैं, जिससे पानी का न्यायसंगत वितरण पूरी तरह ठप पड़ा है।
हैरानी की बात यह है कि शुरुआती क्षेत्र के कई जागरूक किसान खुद फोन करके अधिकारियों से पानी बंद करने का आग्रह कर रहे हैं क्योंकि उनके खेत कई बार सिंचित हो चुके हैं, फिर भी प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि यह मनमानी तुरंत बंद नहीं हुई, तो पानी के बंटवारे को लेकर किसानों के बीच आपसी विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है। आक्रोशित किसानों ने मांग की है कि जायकवाड़ी प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे, आवश्यकता पड़ने पर पुलिस बल की सहायता ले, और पिछले 15-20 दिनों से खुली वितरिकाओं को बंद कर पानी अंतिम छोर के गांवों तक पहुंचाए।

