विशेष संवाददाता / नांदेड/परभणी–
दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड मंडल अंतर्गत कार्यरत टिकट जांच कर्मियों ने अद्वितीय सतर्कता, निष्ठा एवं ईमानदारी का परिचय देते हुए रेलगाड़ियों में छूटे यात्रियों के बहुमूल्य चलभाष (मोबाइल) तथा धन-कोश (पर्स) को सुरक्षित अभिरक्षा में सौंपकर अनुकरणीय सेवा भाव का प्रदर्शन किया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, प्रथम प्रकरण में विगत ६ सितंबर को गाड़ी संख्या १६५९३ बेंगलुरु एक्सप्रेस में टिकट जांच के दायित्व निर्वहन के दौरान चल टिकट निरीक्षक श्री प्रमोद कुमार को एक बर्थ पर लावारिस अवस्था में पड़ा चलभाष प्राप्त हुआ। पड़ताल करने पर ज्ञात हुआ कि यह यंत्र बेंगलुरु से परली की यात्रा कर रहीं ५५ वर्षीया यात्री श्रीमती रमा जोशी का है, जो असावधानीवश उसे आसन पर ही विस्मृत कर उतर गई थीं। श्री प्रमोद कुमार ने तत्परता दिखाते हुए अग्रिम वैधानिक प्रक्रिया हेतु उक्त चलभाष परभणी में पदस्थ रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कर्मी श्री मंते शिवानंद गजानन को सुरक्षित सुपुर्द कर दिया।
द्वितीय प्रकरण में, ७ सितंबर को गाड़ी संख्या २०७०५ वंदे भारत एक्सप्रेस के डिब्बे सी-१२ में कर्तव्यस्थ वरिष्ठ वाणिज्यिक सह टिकट लिपिक श्री विनोद कुमार को एक यात्री का धन-कोश मिला। यह धन-कोश नांदेड से छत्रपति संभाजीनगर की यात्रा कर रहे यात्री श्री नितिन दसरवाड़ का था। श्री विनोद कुमार ने तकनीकी उपकरण (टैब) के माध्यम से यात्री का संपर्क विवरण जुटाकर उनसे संवाद स्थापित किया तथा वस्तु की पुष्टि की। तत्पश्चात, धन-कोश में उपलब्ध ₹१,८८६ नकद, स्वचलित गणक पत्रक (एटीएम कार्ड) एवं अन्य अभिलेखों की विधिवत प्रविष्टि कर उसे ऑन-ड्यूटी सुरक्षा बल की अभिरक्षा में सुरक्षित सौंप दिया गया।
मंडल रेल प्रशासन ने दोनों रेलकर्मियों की कर्तव्यपरायणता, सत्यनिष्ठा एवं संवेदनशीलता की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। प्रशासन ने इस पहल को रेल सेवा के उच्च नैतिक मूल्यों का परिचायक बताया। साथ ही रेल प्रशासन ने समस्त यात्रियों से विनम्र अनुरोध किया है कि वे अपनी यात्रा पूर्ण होने पर उतरने से पूर्व अपने दूरभाष, धन-कोश, आवश्यक प्रलेख एवं समस्त व्यक्तिगत सामग्रियों की भली-भांति जांच अवश्य कर लें।