राज्यशिक्षा

वेतन वृद्धि के लिए न्यायिक कर्मचारियों का बिगुल! परभणी में चारों संगठनों की ऐतिहासिक एकजुटता


​विशेष संवाददाता
परभणी:
लंबे समय से लंबित वेतन वृद्धि के मुद्दे पर निर्णायक लड़ाई छेड़ने के उद्देश्य से परभणी जिले के चारों न्यायिक कर्मचारी संगठनों और सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ ने रविवार, 13 सितंबर को ऐतिहासिक एकजुटता का प्रदर्शन किया। ‘अभी नहीं, तो कभी नहीं’ के आक्रामक नारे के साथ यह विशेष संयुक्त बैठक येलदरकर कॉलोनी स्थित श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर परिसर में सैकड़ों कर्मचारियों की उपस्थिति और भारी उत्साह के बीच संपन्न हुई।
​बैठक के प्रमुख बिंदु और आगामी रणनीति:
​आंदोलन का एकमत संकल्प: सरकार का ध्यान आकर्षित करने और अपने जायज हक हासिल करने के लिए सभी संगठनों ने एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का दृढ़ फैसला किया।
​पहला चरण – 16 सितंबर को ‘काली पट्टी’ आंदोलन: बैठक में परभणी जिला न्यायिक कर्मचारी संगठन (ग्रुप-सी) के अध्यक्ष अमृत कदम ने आगामी आंदोलन की रूपरेखा रखी। उन्होंने आह्वान किया कि आंदोलन के पहले चरण के तहत 16 सितंबर 2026 को सभी कर्मचारी अपने बाजू पर काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इस प्रदर्शन में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया।
​’समान काम, समान वेतन’ का आह्वान: राज्य महासंघ के सचिव विनोद भाऊ पाथरकर ने ‘समान काम, समान वेतन’ के मुद्दे पर वस्तुस्थिति सामने रखी। उन्होंने संघर्ष के समय पीछे हटने वाले निष्क्रिय कर्मचारियों को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि “लड़ाई हमारी, हक सबका; तो फिर संघर्ष में पीछे कौन?” उन्होंने “एक कर्मचारी – एक आवाज! एकजुटता – हमारी ताकत!” का नारा दिया।
​अनुभवी पदाधिकारियों का मार्गदर्शन: सेवानिवृत्त न्यायिक कर्मचारी संघ के सुनीलजी मुद्गलकर ने अपने पुराने संघर्षों के अनुभव साझा करते हुए मार्गदर्शन किया। साथ ही मोहनराव कुलकर्णी, गोपाल टाक, सचिन गौंडगावकर और अशोक सूर्यवंशी ने भी विचार व्यक्त कर आंदोलन को समर्थन दिया।
​संयुक्त नेतृत्व की पहल
यह ऐतिहासिक संयुक्त बैठक अमृत कदम (अध्यक्ष, ग्रुप-सी), शिवराज रगटे (सचिव, स्टेनोग्राफर संगठन), लिंबाजीराव गरुड़ (अध्यक्ष, बेलीफ संगठन) और विजयजी कदम (अध्यक्ष, ग्रुप-डी) के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित हुई।
​बैठक का संचालन अनिल दलवी ने किया, जबकि गणेश शिवलाड ने आभार व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में सुशील कदम, भरत खांडे, रवि क्षीरसागर, मोहन मुंढे, कोंडिबा उजगरे, मितीन खेरुडकर, सुनील डाके, अविनाश तम्मेवार, श्रीधर कर्हाले और गजानन चव्हाण सहित कई कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
​बैठक के अंत में “न्यायिक कर्मचारी एकता जिंदाबाद” के नारों से परिसर गूंज उठा और इसी के साथ एक नए चरणबद्ध संघर्ष की शुरुआत हो गई।

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