
बाल विद्या मंदिर के छात्र पक्षी जीवन के रहस्यों से हुए रूबरू
परभणी:
“भारत जैव विविधता से समृद्ध देश है, जहां अनगिनत प्रकार के वन्यजीव और पक्षी निवास करते हैं। पक्षियों के लिए कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती; वे स्वतंत्र रूप से कहीं भी विचरण कर सकते हैं। पक्षियों का जीवन विविधता और नए अनुभवों से भरा होता है। जब हम उनकी दिनचर्या को समझते हैं, तो प्रकृति का अनोखा कौतुक सामने आता है। छात्रों को नियमित रूप से पक्षी दर्शन करना चाहिए और उनके व्यवहार का अध्ययन करना चाहिए। पक्षी वास्तव में मनुष्य के अभिन्न मित्र हैं, जो प्रकृति का संतुलन बनाए रखकर पर्यावरण को समृद्ध करते हैं।” ये विचार जाने-माने पक्षी मित्र एवं पक्षी निरीक्षक माणिक पुरी ने व्यक्त किए।
स्थानीय नानलपेठ स्थित बाल विद्या मंदिर हाई स्कूल में ‘आनंददायी शिक्षा’ पहल के तहत आयोजित विशेष व्याख्यान में माणिक पुरी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण बोराडे ने की। मंच पर पर्यवेक्षक बलीराम कोपरटकर और सीमा बोके विशेष रूप से मौजूद रहे।
छात्रों को संबोधित करते हुए पुरी ने कहा कि यदि हमें पक्षियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना है, तो अधिक से अधिक पौधारोपण करना होगा। पक्षी संरक्षण का सबसे प्रभावी मार्ग पौधरोपण ही है। उन्होंने रेखांकित किया कि कई पक्षी किसानों के सच्चे मित्र होते हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े-मकोड़ों को खाकर पैदावार की रक्षा करते हैं। वहीं, कौवा प्रकृति का ‘सफाई कर्मी’ बनकर सड़े-गले अवशेषों को समाप्त करता है।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के राज्य पक्षी ‘हरियल’ (येलो-फुटेड ग्रीन पिजन) का उल्लेख करते हुए बताया कि यह आमतौर पर पीपल, बरगद, गूलर, नांदरुक और अंजीर जैसे पेड़ों पर दिखाई देता है। इसके अलावा उन्होंने चंडोल (लार्क), रात भर ‘चक-चक-चकर्र’ की आवाज निकालने वाले रातवा (नाइटजार), राजहंस, पलाश मैना, कठफोड़वा (सुतार), कसाई पक्षी (श्रीक) और गौरैया के जीवन चक्र की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को दूरबीन (बायनोकुलर) के सही उपयोग और पक्षी दर्शन के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए।
कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन सुभाष ढगे ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।