छत्रपति संभाजीनगर /परभणी
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों — रजोनिवृत्ति (Menopause) तथा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOD/PCOS) — से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सक्षम, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य उद्घाटन महात्मा गांधी मिशन (एम.जी.एम.) मेडिकल कॉलेज के दयान हॉल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्रीमती मेघना साकोरे-बोर्डिकर के कर-कमलों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. विजय कंदेवाड़, राज्य स्वास्थ्य शिक्षा एवं संचार विभाग के डॉ. कैलाश बाविस्कर, उपनिदेशक डॉ. आशीष भारती, डॉ. कांचन वानोरे, डॉ. दयानंद मोतीपवले, डॉ. प्रशांत हिंगणकर (यूनिसेफ), डॉ. मंगेश गढ़री (यूनिसेफ), डॉ. श्रीनिवास गडप्पा, डॉ. संतोष कडले, डॉ. सुरेश रावते, डॉ. विनायक खेडकर, डॉ. अभय धानोरकर सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विषय-विशेषज्ञ एवं बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।
समय पर कराएं जांच और परामर्श: राज्यमंत्री
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डिकर ने कहा,
“महिलाएं रजोनिवृत्ति एवं पीसीओडी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की उपेक्षा न करें। लक्षण दिखते ही समय पर जांच कराकर विशेषज्ञों से उचित परामर्श लें। साथ ही, स्वास्थ्य तंत्र व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर इन आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रत्येक महिला तक पहुंचाना सुनिश्चित करे।”
यूनिसेफ के सहयोग से संयुक्त आयोजन
स्वास्थ्य उपनिदेशक कार्यालय (छत्रपति संभाजीनगर) तथा यूनिसेफ (UNICEF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में मराठवाड़ा संभाग के स्त्री रोग विशेषज्ञों, चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यशाला में रजोनिवृत्ति प्रबंधन, पीसीओडी के निदान एवं उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग), स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य तथा आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा गहन मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त परिचर्चा एवं प्रश्नोत्तरी सत्रों के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान एवं कौशल संवर्धन का प्रयास किया गया।
बदलती जीवनशैली और तनाव प्रमुख कारण
कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सा विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि आधुनिक जीवनशैली में बदलाव, असंतुलित आहार, शारीरिक गतिविधियों की कमी तथा बढ़ता मानसिक तनाव पीसीओएस (PCOS) के मामलों में वृद्धि के मुख्य कारण हैं। यदि समय पर रोग का निदान, समुचित परामर्श और स्वस्थ जीवनशैली का पालन किया जाए, तो इस विकार पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
यह विश्वास व्यक्त किया गया कि महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण, सार्वभौमिक एवं सर्वसमावेशी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह राज्य स्तरीय कार्यशाला एक मील का पत्थर साबित होगी।