आदर्श शिक्षिका, लेखिका एवं समाजसेविका कमल प्रभाकरराव कुलकर्णी का निधन
जीए तो कैसे- जाने के बाद नाम शेष रहे
परभणी (प्रतिनिधि): परभणी के रामकृष्ण नगर क्षेत्र की निवासी, आदर्श शिक्षिका, वरिष्ठ लेखिका, कवयित्री, ज्ञानेश्वरी साधिका एवं समाजसेविका कमल प्रभाकरराव कुलकर्णी (आयु 86 वर्ष) का आज सोमवार सुबह 8 बजे वृद्धावस्था के कारण निधन हो गया। उनके निधन से शैक्षणिक, साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।
उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे जिंतूर रोड स्थित वैकुंठधाम में किया जाएगा।
कमल कुलकर्णी ने एक शिक्षिका के रूप में अनेक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने के साथ-साथ साहित्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका काव्य-संग्रह ‘भावतरंग’ तथा कहानी-संग्रह ‘पंख कापलेल्या पक्षाची भरारी’ (पंख कटे पक्षी की उड़ान) और ‘दीपस्तंभ’ पाठकों द्वारा काफी सराहे गए। ब्राह्मण अधिवेशन में उनके द्वारा प्रस्तुत की गई कविता ‘रक्त ब्राह्मणी होते’ विशेष रूप से चर्चित रही थी। उनकी साहित्य सेवा के लिए उन्हें करवीर पीठ के शंकराचार्य द्वारा सम्मानित किया गया था।
80 वर्ष की आयु में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उनका साहसिक संघर्ष अनेक लोगों के लिए प्रेरणादायी सिद्ध हुआ। कैंसर को परास्त कर उन्होंने अगले छह वर्षों तक स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन व्यतीत करते हुए समाजसेवा तथा साहित्य साधना जारी रखी।
वह अपने पीछे पुत्र प्रवीण कुलकर्णी, पुत्रियाँ आशा एवं निशा, पौत्र-पौत्रियों तथा परपौत्रों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
उनके निधन पर विभिन्न क्षेत्रों की गणमान्य हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।