
परभणी—
वेदमूर्ति उमेश अनंतमहाराज टाकलीकर को महाराष्ट्र शासन का प्रतिष्ठित ‘महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार’
वेदमूर्ति टाकलीकर ने रत्नागिरी, बासर, सातारा और पुणे में गुरुकुल की शाखाओं का सफल संचालन कर वेद विद्या का व्यापक प्रसार किया है। उनके गुरुकुलों से अब तक 500 से अधिक शिष्य अध्ययन पूर्ण कर चुके हैं। गुरुकुल परंपरा में उन्होंने वैदिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक व आधुनिक स्कूली शिक्षा का समन्वय कर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की नींव रखी।
वेद विद्या और संस्कृत के संवर्धन में उनके इस अमूल्य योगदान को मान्यता देते हुए महाराष्ट्र शासन ने उन्हें इस सर्वोच्च राज्यस्तरीय सम्मान से अलंकृत करने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद संस्कृत, वैदिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में हर्ष की लहर है तथा विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें बधाई प्रेषित की है।