
परभणी, ५ जुलाई:
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और श्री शिवाजी विधि महाविद्यालय, परभणी के संयुक्त तत्वावधान में ‘लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, २०१२ (पॉक्सो)’ विषय पर एक दिवसीय जागरूकता प्रशिक्षण शिविर का आयोजन आज श्री शिवाजी विधि महाविद्यालय में संपन्न हुआ।
बालकों की सुरक्षा के प्रति समाज में संवेदनशीलता निर्माण करने के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में न्यायपालिका, पुलिस, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थियों को गहन मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम में बॉम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति तथा परभणी जिले के पालक न्यायमूर्ति संजय ए. देशमुख उद्घाटक एवं मुख्य मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष आर. एम. सादराणी ने की। इस अवसर पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एस. टी. अडकिने और श्री शिवाजी विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम. एल. धर्मापुरीकर भी मंच पर उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा पौधों को जल अर्पित कर किया गया।
उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति संजय देशमुख ने कहा कि बचपन प्रत्येक बालक का नैसर्गिक अधिकार है। भय, अत्याचार और शोषण के बजाय प्रेम, सम्मान और सुरक्षा ही उनका वास्तविक वातावरण होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध घटित होने के उपरांत वैधानिक कार्रवाई करने से कहीं अधिक आवश्यक यह है कि अपराध घटित ही न हो, और इसके लिए समाज में व्यापक जागरूकता निर्माण करना समय की मांग है।
उन्होंने आगे कहा कि “दुष्टों के प्रति कठोरता” की नीति अपनाते हुए प्रत्येक नागरिक को कानून का आदर करना चाहिए। मीठी बातें कर विश्वास जीतने वाले व्यक्तियों से सतर्क रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “जहाँ अत्यधिक विश्वास होता है, वहीं विश्वासघात की आशंका भी सर्वाधिक होती है।”
संत समर्थ रामदास के विचारों का संदर्भ देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से जुडो, कराटे और कुश्ती जैसे आत्मरक्षणात्मक कौशलों को अपनाने का आह्वान किया, ताकि संकट के समय वे साहसपूर्वक अपनी रक्षा कर सकें। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे स्वयं को निर्बल न समझें और किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना पूर्ण आत्मविश्वास के साथ करने के लिए मानसिक रूप से तत्पर रहें।
कार्यक्रम की प्रस्तावना न्यायाधीश आर. एम. सादराणी ने प्रस्तुत की।
इस सत्र में जांच अधिकारी श्री स्वामी ने पॉक्सो मामलों के अन्वेषण अर्थात जांच के दौरान आने वाली कानूनी व व्यावहारिक कठिनाइयों से अवगत कराया, जबकि डॉ. किशोर सुरवसे ने चिकित्सीय परीक्षण प्रक्रिया की व्यावहारिक समस्याओं और उनके निवारण पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस. डी. जवंजाल ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्राचार्य डॉ. एम. एल. धर्मापुरीकर द्वारा किया गया। इस प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव भूषण एम. काले के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
इस शिविर में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक, शिक्षक, खंड शिक्षा अधिकारी, केंद्र प्रमुख, पत्रकार, विद्यार्थी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। श्री शिवाजी विधि महाविद्यालय तथा जिला न्यायालय के अधिकारी-कर्मचारियों के सक्रिय सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

