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बाल विवाह रोकने के लिए अब विवाह-पत्रिका पर छापनी होगी वर-वधू की जन्मतिथि

बालविवाह रोकने के लिए प्रशासन का सख्त कदम

परभणी, १ जुलाई: बाल विवाह का पारंपरिक उद्घोष अब कानूनी चेतावनी के रूप में गूंजेगा। राज्य में बाल विवाह के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए ‘महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुशंसा की है। इसके अंतर्गत अब विवाह-पत्रिका (लग्नपत्रिका) पर वधु और वर, दोनों की पूर्ण जन्म तिथि छापना अनिवार्य होगा। राजस्थान की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी इस नियम को लागू करने का निर्णय ‘महिला एवं बाल विकास विभाग’ ने लिया है।

​राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बाल विवाह धड़ल्ले से होते हैं। अक्षय तृतीया और देव दीपावली के शुभ मुहूर्तों पर यह संख्या और अधिक बढ़ जाती है। कई बार स्कूली छात्राओं को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़कर विवाह के मंडप में बैठना पड़ता है। ऐसी कुप्रथाओं पर रोक लगाने के लिए ही विवाह-पत्रिका के माध्यम से आयु का प्रमाण देने की यह अभिनव पहल की गई है।

ऐसा होगा नया नियम

​नए नियम के अनुसार, छपाई के लिए आने वाली प्रत्येक विवाह-पत्रिका पर वधु और वर की जन्म तिथि, जन्म स्थान और [आधार क्रमांक ओमित] सहित आयु का प्रामाणिक दस्तावेज़ अंकित करना अनिवार्य होगा। यदि यह जानकारी असत्य पाई गई, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सीधे आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।

मुद्रणालय (प्रिंटिंग प्रेस) और विवाह मंडपों (मंगल कार्यालय) पर रहेगी कड़ी नजर

​इस अभियान में मुद्रणालय और विवाह मंडपों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। विवाह-पत्रिका छापते समय यदि वधु की आयु १८ वर्ष और वर की आयु २१ वर्ष से कम पाई जाती है, तो मुद्रणालय के स्वामी को छपाई करने से मना करना होगा, ऐसे आदेश जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही, विवाह मंडप (मैरिज हॉल) की बुकिंग करते समय दोनों की आयु के दस्तावेजों की जांच करने का उत्तरदायित्व वहां के प्रबंधन पर होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर मुद्रणालय का अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) निरस्त होने के साथ-साथ उसके स्वामी पर भी ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम’ के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विशेष शिक्षकों की होगी नियुक्ति

​बाल विवाह के कारण बालिकाओं की शिक्षा बाधित हो जाती है। ऐसे विद्यार्थियों को पुनः मुख्यधारा में लाने के लिए जिला परिषद द्वारा स्वतंत्र रूप से विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। विवाह-पत्रिका पर जन्म तिथि अनिवार्य होने से अब आयु छुपाना संभव नहीं होगा।

दंड का क्या है प्रावधान?

​’बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम’ के अनुसार, बाल विवाह करने अथवा उसे बढ़ावा देने पर दो वर्ष तक के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये तक के आर्थिक दंड (जुर्माने) का प्रावधान है। अब विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित (पंडित), छायाकार (फोटोग्राफर), खान-पान व्यवस्थापक (कैटरर्स) और विवाह-पत्रिका छापने वाले मुद्रणालय के स्वामी को भी सह-आरोपी बनाया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, ‘हमें इस बात की जानकारी नहीं थी’ कहकर बचने का मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा।

प्रशासन की अपील:

“संपूर्ण जिले में कोई भी बाल विवाह न हो, इसके लिए सभी संबंधित घटकों को सतर्क रहना होगा और परभणी को ‘बाल विवाह मुक्त जिला’ बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। यदि गांव या शहर में कहीं भी बाल विवाह तय हुआ हो, तो इसकी सूचना तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल-फ्री क्रमांक 1098 पर दें।”

मोनिका रंधवे, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी

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