विगत तीन दिनों में जिंतूर, मानवत, सेलू, परतूर एवं परभणी तहसील के १९९ विद्यार्थियों को शैक्षणिक किट एवं पाठ्यपुस्तक सेट का वितरण
परभणी:
होमिओपैथिक एकेडमी ऑफ रिसर्च एंड चैरिटीज (एचएआरसी), परभणी के ‘शैक्षणिक अभिभावकत्व उपक्रम २०२६’ के अंतर्गत परभणी तहसील के ५० एकल माता-पिता (सिंगल पैरेंट) तथा अनाथ विद्यार्थियों को शैक्षणिक किट वितरित की गई। शिवाजीनगर स्थित योग साधना केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाधिकारी संजय ससाने एवं श्री शिवाजी महाविद्यालय के उपप्राचार्य प्रो. डॉ. श्रीनिवास केशट्टी प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
इस अवसर पर एचएआरसी के अध्यक्ष डॉ. पवन सत्यनारायण चांडक, सीए रोहित मंत्री, डॉ. दीपक महिंद्रकर, डॉ. आशा चांडक, पद्मा भालेराव, एडवोकेट चंद्रकांत राजुरे, राजेश्वर वासलवार, राजेश चव्हाण, संतोष माहुरकर, दीपाली भावसार सहित अभिभावक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
”शिक्षा ही जीवन में प्रगति का प्रभावी साधन है।”
— शिक्षाधिकारी संजय ससाने ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और निरंतर अध्ययन के बल पर सफलता अर्जित की जा सकती है।
उपप्राचार्य प्रो. डॉ. श्रीनिवास केशट्टी ने विद्यार्थियों से अध्ययन (वाचन) संस्कृति को आत्मसात करने और उच्च शिक्षा के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
संस्था के अध्यक्ष डॉ. पवन सत्यनारायण चांडक ने बताया कि संस्था ने इस वर्ष ४०० एकल माता-पिता के बच्चों एवं अनाथ विद्यार्थियों तक शैक्षणिक सहायता पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक जिंतूर, मानवत, सेलू, परतूर एवं परभणी तहसील के कुल १९९ विद्यार्थियों को शैक्षणिक किट तथा पाठ्यपुस्तक सेट का वितरण किया जा चुका है।
इस कल्याणकारी उपक्रम के अंतर्गत पारवा, कुंभारी, भोगांव, पिंगली, मिरखेल, उखलद, तादलीमला, अंगलगांव, वांगी, मटकराला, मुरंबा एवं संबर के विद्यार्थियों को स्कूल बैग, कापियाँ, पेन, पेंसिल, रंग पेटी, ड्राइंग बुक तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियों का वितरण किया गया।
इस सेवा कार्य में सीए रोहित मंत्री, अतुल जावले, स्वाती सारडा, प्राचार्य श्रीधर कोल्हे, श्रीमती भारती लोया, महेश मनियार, आहार विशेषज्ञ मधुसूदन सोनी, डॉ. माणिक मसारे, डॉ. विजय शेलके, श्रीकांत भुतड़ा, डॉ. सतीश पंचदार आदि दानदाताओं ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. पवन सत्यनारायण चांडक ने रखी, मंच संचालन पद्मा भालेराव ने किया तथा अनुराधा अमिलकंठवार ने आभार व्यक्त किया।



