परभणी: स्थानीय गणेश नगर स्थित महात्मा फुले विद्यालय की शाखा में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम क्रांतिसूर्य महात्मा जोतीराव फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले द्वारा 3 जुलाई 1852 को पुणे के वेतालपेठ (चिपळूणकर वाड़ा) में अस्पृश्य समाज के बच्चों के लिए देश का पहला विद्यालय आरंभ किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस ऐतिहासिक दिवस की स्मृति में 3 जुलाई 2026 को विद्यालय परिसर में भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ।
आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के पर्यवेक्षक शिवाजीराव विरशे ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्राध्यापक लखनसिंह जाधव, श्रीमती वर्षाताई पारवे, श्रीमती उषाताई सुतार, श्रीमती समृद्धि मस्के, श्रीमती प्रियंका पोले, प्रदीप चव्हाण एवं विख्यात कथाकार राजेंद्र गहाळ सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ क्रांतिसूर्य महात्मा जोतीराव फुले एवं क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन (प्रतिमा पूजन) के साथ हुआ। इसके पश्चात मचंक जुकटे ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत की। कार्यक्रम के आरंभिक चरण में विद्यार्थियों ने ज्ञानदूतों के जीवन पर अपने विचार रखे।
तदनंतर, मुख्य अतिथि कथाकार राजेंद्र गहाळ, श्रीमती वर्षाताई पारवे, प्रदीप चव्हाण एवं सुरेश तांबोळी ने महात्मा फुले के क्रांतिकारी जीवन और समाज कल्याण के कार्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शिवाजीराव विरशे ने कहा कि महात्मा फुले ने समाज के वंचित और अस्पृश्य वर्ग के लिए शिक्षा के द्वार खोलकर आधुनिक भारत की नींव रखी।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती उषाताई सुतार ने किया तथा उपस्थित जनों के प्रति आभार प्रदर्शन श्रीमती समृद्धि मस्के द्वारा किया गया। इस गरिमामयी आयोजन को सफल बनाने में सांस्कृतिक विभाग प्रमुख श्रीमती वर्षाताई पारवे, श्रीमती उषाताई सुतार, ज्ञानेश्वर शिंदे, दशरथ रानगिरे, सुभाष यवतकर, अनिल नाईक, सुजित राठोड, पांडुरंग जगताप एवं गणेश सोळंके सहित समस्त विद्यालय परिवार ने अथक परिश्रम किया।