कंप्यूटर ऑपरेटरों के मुद्दे पर विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने मंत्री को आड़े हाथों लिया
युवाओ के पसीने की किमत खोकली घोषणा से नही होती
परभणी, १ जुलाई:
विधानसभा में जब मंत्री महोदय ने कंप्यूटर ऑपरेटरों को “उद्यमी” संबोधित करते हुए दावा किया कि सरकार ने 20 हजार उद्यमी तैयार किए हैं, तो परभणी के विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने सदन में इस भ्रामक दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “कंप्यूटर ऑपरेटरों को ‘उद्यमी’ कहकर सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, परंतु वास्तविकता इससे पूर्णतः भिन्न है!”
विधानसभा सत्र के दौरान विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने कंप्यूटर ऑपरेटरों को 17 हजार रुपये मानदेय देने की मांग की थी। इसके उत्तर में ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने विचित्र दावा करते हुए कहा कि कंप्यूटर ऑपरेटर उद्यमी हैं। इस पर विधायक पाटिल भड़क गए और उन्होंने मंत्री गोरे को आड़े हाथों लेते हुए उन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “यह एक व्यावसायिक सेवा है।” तो फिर यह वास्तव में कौन सा व्यवसाय है? ग्राम पंचायत में नागरिकों को जन्म, मृत्यु, आय, निवास जैसे विभिन्न प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना एक सेवा है, परंतु इसे व्यापार कैसे कहा जा सकता है? और यह सेवा प्रदान करने वाले युवाओं को उद्यमी कैसे कहा जा सकता है? केवल संविदा पद्धति से काम कराकर उन पर “उद्यमी” का ठप्पा लगाना, उनकी वास्तविक स्थिति से पल्ला झाड़ने का प्रयास है। कंप्यूटर ऑपरेटरों को उद्यमी कहना अत्यंत लज्जाजनक है, अतः ऐसे शब्दों का प्रयोग कर उन्हें गुमराह न किया जाए। इन कड़े शब्दों में उन्होंने मंत्री गोरे को खरी-खरी सुनाई।
विधायक पाटिल ने आगे कहा कि किसी बड़ी कंपनी का प्रशिक्षण या प्रमाण पत्र मिल जाने से कोई उद्यमी नहीं बन जाता! प्रति माह केवल 10 हजार रुपये पर दिन में 12-12 घंटे कार्य करने वाले युवाओं को उद्यमी कहना उनके संघर्ष का उपहास उड़ाने जैसा है।
यदि ये वास्तव में श्रमिक नहीं हैं, तो इनसे इतने घंटे कार्य क्यों कराया जाता है? और यदि ये श्रमिक हैं, तो इन्हें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण क्यों नहीं दिया जाता? उन्होंने सदन में सरकार से स्पष्ट शब्दों में जवाब मांगा और कंप्यूटर ऑपरेटरों को न्यूनतम 17
हजार रुपये वेतन देने की दृढ़ मांग की। उन्होंने अंत में कहा कि युवाओं के पसीने की कीमत खोखली घोषणाओं से नहीं, बल्कि न्यायसंगत वेतन से तय होती है! सरकार दिखावटी दावों को छोड़कर कंप्यूटर ऑपरेटरों को न्याय प्रदान करे।

