पुलिस थाने के मुख्य द्वार के सामने पूर्व नगराध्यक्ष का मकान फोडा
पूर्णा शहर की घटना; सवा लाख रुपये की नकदी पार; चोरों की पुलिस को 'खुली चुनौती'? पुलिस की कार्यप्रणाली पर नागरिकों ने उठाए प्रश्न; शहर में चर्चा का बाजार गर्म

पूर्णा (प्रतिनिधि):
पूर्णा शहर में चोरों द्वारा सीधे पुलिस प्रशासन को ही चुनौती देने का एक गंभीर मामला सामने आया है। पूर्णा पुलिस थाने के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने स्थित पूर्व नगर अध्यक्ष स्व. सुभाषसिंह ठाकुर के आवास का ताला तोड़कर अज्ञात चोरों ने सवा लाख रुपये से अधिक की नकदी उड़ा ली। यह घटना शुक्रवार मध्यरात्रि की है। विशेष बात यह है कि पुलिस थाने के ऐन सामने चोरी होने से नागरिकों में यह सवाल उठ रहा है कि “यदि पुलिस थाने की चौखट पर भी घर सुरक्षित नहीं हैं, तो शहर के आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या होगा?”
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक परिसर में पूर्णा पुलिस थाने के प्रवेश द्वार के सामने वाली सड़क पर ठाकुर परिवार का मकान है। परिवार के बाहर जाने का अवसर पाकर अज्ञात अपराधियों ने शुक्रवार मध्यरात्रि मकान का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया। चोरों ने दो कमरों में रखी चार अलमारियों के ताले तोड़कर लगभग १ लाख २८ हजार रुपये की नकदी चुरा ली।
घटना की सूचना शनिवार को पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस दल ने मौके पर पहुँचकर पंचनामा किया। इस संदर्भ में पूर्णा पुलिस थाने में पूजा सुभाषसिंह ठाकुर की शिकायत पर अज्ञात चोरों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। परिसर में पुलिस थाने और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित होने के बावजूद अपराधियों द्वारा इस प्रकार का दुस्साहस किए जाने से पुलिस की रात्रि गश्त और प्रतिबंधात्मक व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। शहर में पूर्व की कई चोरियों की जाँच लंबित है, ऐसे में इस मामले में पुलिस कितनी तत्परता दिखाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
अपराधिक घटनाओं की श्रृंखला; पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
पूर्णा पुलिस थाने का प्रभार संभालने वाले नए पुलिस निरीक्षक बेंद्रे के ढाई से तीन माह के कार्यकाल में शहर की कानून-व्यवस्था चरमराने की चर्चा ज़ोरों पर है। विगत कुछ महीनों में हत्या, हत्या का प्रयास, उत्पीड़न, धोखाधड़ी और चोरी जैसी गंभीर आपराधिक घटनाएँ घटित हुई हैं। इनमें से कुछ मामलों में पुलिस को अब तक आरोपियों को पकड़ने में सफलता नहीं मिल सकी है। ऐसे में थाने के प्रवेश द्वार के सामने चोरी होने से नागरिकों में भारी असंतोष है।
क्या रात्रि गश्त केवल बाज़ार बंद कराने तक सीमित?
पूर्णा शहर में प्रभावी रात्रि गश्त बढ़ाने की माँग नागरिक लगातार कर रहे हैं। रात दस बजे के आसपास बाज़ार बंद कराने के लिए पुलिस बल मुस्तैद दिखाई देता है; परंतु उसके पश्चात विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में नियमित गश्त की आवश्यकता महसूस की जा रही है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक, सिद्धार्थनगर, हरिनगर, विजयनगर, आनंदनगर, आदर्श कॉलोनी तथा बाज़ार क्षेत्र में मध्यरात्रि में पुलिस की उपस्थिति बढ़ाने की अपेक्षा जताई जा रही है।
नाकामुकद्दमे की चुनौती; पुलिस की असली परीक्षा
पुलिस थाने के ठीक सामने चोरी होना केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था की कसौटी है। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा स्थल से मिले सुरागों के आधार पर अपराधियों का शीघ्र पता लगाकर उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचाना पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब यह देखना शेष है कि पुलिस जाँच चोरों तक पहुँचती है या यह मामला भी केवल कागज़ी कार्यवाही तक सीमित रह जाता है।