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​एकल महिलाओं के लिए ‘पूर्णांगिनी’ जैसे सकारात्मक शब्द का प्रयोग करें: जिलाधिकारी संजयसिंह चव्हाण

जिले में ४८% बाल विवाह; सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन आवश्यक: मुख्य कार्यकारी अधिकारी नतिशा माथूर

परभणी (प्रतिनिधि):

महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला परिषद परभणी के तत्वावधान में आयोजित “एकल महिला नीति” विषयक जिला स्तरीय कार्यशाला मंगलवार, २३ जून २०२६ को जिला परिषद के सभागार में अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। इस कार्यशाला में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, एकल महिला प्रतिनिधियों और जिला परिषद के विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं संबंधित अधिकारियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराते हुए उत्कृष्ट प्रतिक्रिया दी।

​कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा महात्मा ज्योतिबा फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती रेखा कालम ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कार्यशाला की भूमिका, उद्देश्य और एकल महिला नीति की आवश्यकता के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार एकल महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण हेतु एक प्रभावी नीति तैयार करने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था।

​💡 कार्यशाला के मुख्य बिंदु एवं विचार:

    • नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर (जिलाधिकारी श्री संजयसिंह चव्हाण): ​”विवाहित होने पर स्त्री को ‘अर्धांगिनी’ कहा जाता है, और जब वह विधवा या एकल हो जाती है, तो उसे समाज में उपेक्षित किया जाता है। अतः ‘एकल महिला’ जैसे नकारात्मक शब्द के स्थान पर ‘पूर्णांगिनी’ जैसे सकारात्मक शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए। एकल महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, और उनके बच्चों के पालन-पोषण व शिक्षा के लिए शासन स्तर पर अधिक प्रभावी और समावेशी नीति लागू करने की महती आवश्यकता है।”

​”विवाहित होने पर स्त्री को ‘अर्धांगिनी’ कहा जाता है, और जब वह विधवा या एकल हो जाती है, तो उसे समाज में उपेक्षित किया जाता है। अतः ‘एकल महिला’ जैसे नकारात्मक शब्द के स्थान पर ‘पूर्णांगिनी’ जैसे सकारात्मक शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए। एकल महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, और उनके बच्चों के पालन-पोषण व शिक्षा के लिए शासन स्तर पर अधिक प्रभावी और समावेशी नीति लागू करने की महती आवश्यकता है।”

 

        • शिक्षा एवं व्यसनमुक्ति पर बल मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती नतिशा माथूर-: ​”जब तक समाज व्यसनमुक्त नहीं होगा, तब तक सुधार संभव नहीं है। इसके लिए संपूर्ण समाज को व्यसनमुक्ति के लिए कार्य करना होगा। प्रत्येक बालिका को न्यूनतम स्नातक (ग्रेजुएशन) तक की शिक्षा पूर्ण कर आत्मनिर्भर बनने से पूर्व विवाह नहीं करना चाहिए। परभणी जिले में वर्तमान में ४८% बाल विवाह होते हैं, जो चिंताजनक है। सामाजिक संस्थाओं और व्यवस्था में व्यापक वैचारिक परिवर्तन की आवश्यकता है।”

​”जब तक समाज व्यसनमुक्त नहीं होगा, तब तक सुधार संभव नहीं है। इसके लिए संपूर्ण समाज को व्यसनमुक्ति के लिए कार्य करना होगा। प्रत्येक बालिका को न्यूनतम स्नातक (ग्रेजुएशन) तक की शिक्षा पूर्ण कर आत्मनिर्भर बनने से पूर्व विवाह नहीं करना चाहिए। परभणी जिले में वर्तमान में ४८% बाल विवाह होते हैं, जो चिंताजनक है। सामाजिक संस्थाओं और व्यवस्था में व्यापक वैचारिक परिवर्तन की आवश्यकता है।”

 

        • योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें (महिला एवं बाल विकास सभापति सौ. ऐश्वर्या अजयराव चव्हाण): ​”यह नीति एकल महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए है। एकल महिलाओं के कल्याणार्थ संचालित योजनाएं केवल कागजों पर सीमित न रहें, इसके लिए मैं पूर्ण निष्ठा और समय देकर धरातल पर कार्य करूँगी।”

​”यह नीति एकल महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए है। एकल महिलाओं के कल्याणार्थ संचालित योजनाएं केवल कागजों पर सीमित न रहें, इसके लिए मैं पूर्ण निष्ठा और समय देकर धरातल पर कार्य करूँगी।”

 

​📋 विविध विषयों पर विस्तृत विमर्श

​कार्यशाला के दौरान एकल महिलाओं की समस्याएं, उनके अधिकार, शासकीय योजनाओं के लाभ, रोजगार के अवसर, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आश्रय और आर्थिक स्वावलंबन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित प्रतिनिधियों ने अपनी राय, सुझाव और अनुभव साझा किए।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति:

इस अवसर पर परियोजना निदेशक डॉ. स्मिता पाटिल, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती रश्मी खांडेकर, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (पंचायत) अंकुश चव्हाण और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती मोनिका रंधवे प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

आभार प्रदर्शन:

जिल्हा महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती मोनिका रंधवे ने कार्यशाला में प्राप्त सभी महत्वपूर्ण सुझावों और प्रतिपुष्टियों (फीडबैक) को आगामी नीति निर्धारण हेतु राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया। अंत में उन्होंने सभी उपस्थितों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

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