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फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई करें: विधानसभा में विधायक डॉ. राहुल पाटिल की मांग

सरकार द्वारा दंडात्मक कार्रवाई का आश्वासन

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परभणी, २४ जून:

परभणी सहित संपूर्ण मराठवाड़ा क्षेत्र में सक्रिय फर्जी (बोगस) डॉक्टरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग परभणी के विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने विधानसभा में उठाई। इस विषय पर संज्ञान लेते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीम ने त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

​मराठवाड़ा और परभणी में फर्जी डॉक्टरों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे रोगियों का त्रुटिपूर्ण एवं त्रुटिपूर्ण उपचार हो रहा है। इस गंभीर जनहित के मुद्दे को विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन के पटल पर रखा।

​सदन को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. पाटिल ने कहा:

​”मराठवाड़ा में व्यापक स्तर पर फर्जी डॉक्टरों की संख्या बढ़ी है। विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों में बंगाली डॉक्टर सक्रिय हैं, जिनके पास कोई प्रामाणिक शैक्षणिक उपाधि (डिग्री) नहीं है। इसके उपरांत भी वे अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय कर रहे हैं और सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अतः इन छद्म डॉक्टरों पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए।”

​विधायक डॉ. पाटिल ने आगे आरोप लगाया कि फर्जी डॉक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए गठित जिला स्तरीय समितियां निष्क्रिय हैं। इन समितियों के अध्यक्ष पद पर आसीन जिलाधिकारी किसी भी प्रकार की जांच अथवा दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इन जिला समितियों में जन प्रतिनिधियों को सम्मिलित किया जाए, जिससे ऐसे सभी संदिग्ध डॉक्टरों की सघन जांच हो सके, उनके चिकित्सा लाइसेंस सत्यापित किए जा सकें और दोषियों को दंडित किया जा सके।

​विधायक पाटिल की इस मांग पर उत्तर देते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि फर्जी डॉक्टरों की जांच के लिए गठित समितियों में अब जन प्रतिनिधियों को भी सम्मिलित किया जाएगा और इन समितियों का पुनर्गठन होगा। इसके अतिरिक्त, एक नवीन तकनीक अथवा ‘कोड प्रणाली’ (Code System) विकसित की जाएगी जिससे फर्जी डॉक्टरों की पहचान सुलभ हो सके। मंत्री मुश्रीफ ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे ऐसे संदिग्ध और फर्जी डॉक्टरों की शिकायत निर्भीक होकर प्रशासन से करें।

​विधायक डॉ. राहुल पाटिल द्वारा उठाए गए इस अत्यंत संवेदनशील प्रश्न के कारण क्षेत्र में फर्जी डॉक्टरों का मुद्दा पुनः चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस कदम से जनता में यह आशा जागी है कि सरकार निश्चित रूप से इस विषय पर ध्यानाकर्षण करेगी और प्रकार के इस अवैध तंत्र पर पूर्णतः अंकुश लगाएगी।

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