परभणी :
जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ उसका सटीक और विस्तृत दस्तावेजीकरण करना समय की मांग है। स्थानीय नागरिक खुद आगे आकर विरासत स्थलों के संरक्षण का उचित नियोजन करें। इस कार्य में सांस्कृतिक कार्य विभाग और पुरातत्व विभाग की ओर से पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा। यह विचार मराठी भाषा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी ने व्यक्त किए।
डॉ. कुलकर्णी ने सेलू तहसील के वालूर और हतणूर का दौरा कर वहां के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वालूर की बावड़ी (बारव), हतणूर की बावड़ी तथा चालुक्यकालीन हेमाड़पंथी मंदिर का जायजा लिया और उनके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी प्राप्त की।
विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों की सराहना
हतणूर के ग्रामीणों द्वारा ऐतिहासिक विरासत स्थलों को सहेजने के लिए किए गए प्रयासों की डॉ. कुलकर्णी ने विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि गांव की ऐतिहासिक इमारतों, बावड़ियों और मंदिरों की विशेषताओं का अध्ययन करने के लिए देश-विदेश से शोधकर्ता आ सकते हैं। यदि इन स्थलों के महत्व को सही ढंग से रेखांकित कर वैज्ञानिक एवं शास्त्रीय पद्धति से इनका दस्तावेजीकरण किया जाए, तो भविष्य में वालूर और हतणूर जैसे गांवों के लिए वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर उभरने का एक बड़ा अवसर बनेगा।
हतणूर को ‘पुस्तकों का गांव’ के रूप में विकसित करने पर विचार
डॉ. कुलकर्णी ने हतणूर को जिले के पहले ‘पुस्तकों का गांव’ (विलेज ऑफ बुक्स) के रूप में पहचान दिलाने के लिए प्रयास करने का मार्गदर्शन भी दिया। उन्होंने कहा कि गांव की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजने के लिए ग्रामीण एकजुट होकर पहल करें। उपलब्ध जानकारी, ऐतिहासिक संदर्भों और परंपराओं का संकलन कर उनका सटीक रिकॉर्ड रखें। यदि ग्रामीण अपनी जिम्मेदारियों को समझकर योजनाबद्ध तरीके से काम करेंगे, तो इन विरासत स्थलों के संरक्षण और संवर्धन को निश्चित रूप से गति मिलेगी।
उन्होंने आश्वासन दिया कि शासन स्तर पर इस कार्य की समुचित पैरवी और अनुगमन के लिए संबंधित विभाग पूरा सहयोग करेंगे।
इस अवसर पर प्रखंड विकास अधिकारी उदय जाधव, विरासत समिति के सदस्य मल्हारीकांत देशमुख, अनिल स्वामी, अनिल बडगुजर, नागेश जोशी, पुलिस पाटिल रामचंद्र पारवे, सरपंच महेंद्र गाडे, मंदिर समिति के सदस्य दत्तराव आंधळे, एडवोकेट गोविंदराव शेळके सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। नागेश्वर मंदिर के सभागार (सभामंडप) में डॉ. कुलकर्णी ने ग्रामीणों से संवाद साधा। 
