राज्यराजनीति

मराठवाड़ा सूखा: केंद्रीय दल ने दूसरे दिन भी देखी सूखे की विभीषिका, बीड जिले में 15 जगहों पर जमीनी मुआयना

​बारिश गायब, जलस्रोत सूखे; अब सिर्फ सरकारी मदद पर टिकी किसानों की उम्मीदें!

​छत्रपति संभाजीनगर / बीड/परभणी

कहीं सोयाबीन की रुकी हुई वृद्धि, कहीं हाथ आया निवाला छीन जाने जैसा बर्बाद हुआ खेत, तो कहीं सूख चुके तालाबों के बीच गहराया जल संकट। मवेशियों के चारे की चिंता, बागवानी बचाने की जद्दोजहद और पीने के पानी के लिए ग्रामीणों का लंबा इंतजार—बीड जिले में सूखे की यह भयावह तस्वीर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल के जमीनी निरीक्षण में खुलकर सामने आई। शनिवार, 10 अक्टूबर को केंद्रीय दल ने जिले के 15 अलग-अलग स्थानों पर रुककर फसलों, जलस्रोतों और पेयजल आपूर्ति की गंभीर स्थिति का जायजा लिया।

​केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव तथा दल प्रमुख मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में यह दौरा संपन्न हुआ। इस दल में राज्य के कृषि सचिव परिमल सिंह, महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र के उपनिदेशक सुनील कुमार दुबे, जिलाधिकारी डॉ. विवेक जॉनसन और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

​उत्पादन 7 से 8 क्विंटल की जगह मात्र 50 किलो रहने की आशंका

​बीड तहसील के मोरगांव में बाबासाहेब चोखामार के दो एकड़ सोयाबीन के खेत का निरीक्षण करते हुए सूखे की मार साफ दिखाई दी। कृषि सहायकों ने अधिकारियों को बताया कि सामान्य स्थिति में प्रति एकड़ 7 से 8 क्विंटल उत्पादन मिलता है, लेकिन इस बार प्रति एकड़ महज 50 किलो पैदावार की ही उम्मीद बची है। मोरगांव के करीब 1,400 किसानों में से लगभग 70 फीसदी किसानों की 33 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है।

​दल ने किरण भास्कर केकाण के खेत का भी मुआयना किया। पास के खंडाला गांव में किसानों ने बताया कि कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं और सोयाबीन के पौधे तीन फीट भी नहीं बढ़ पाए।

​65 दिनों से बारिश नहीं; सोयाबीन के साथ फलबाग भी संकट में

​पाटोदा तहसील के वैद्यकिन्ही और सोनेगांव में बीते 65 दिनों से बारिश नहीं हुई है। वैद्यकिन्ही के किसान देवीदास भानदास ने बताया कि बारिश न होने से लगातार दूसरे साल उनकी फसल बर्बाद हो गई है।

​सोनेगांव में सोयाबीन के अलावा अरहर, अनार, मौसंबी और अंगूर के बगीचे भी पानी की कमी से सूखने की कगार पर हैं। किसान अशोक चौरे ने सरकार से खरीफ फसलों के लिए ₹50,000 प्रति हेक्टेयर और फलबागों के लिए ₹2 लाख प्रति हेक्टेयर की आपात राहत देने की मांग उठाई।

​महिला किसान को सोयाबीन सुखाते देख रुका काफिला

​दाशखेड में खेत में सोयाबीन सुखा रहीं रेखा जयंत कोकाटे को देखकर केंद्रीय दल का काफिला रुक गया। रेखा ने बताया, “पिछले साल 30 बोरी सोयाबीन हुआ था, लेकिन इस बार डेढ़ से दो एकड़ में बामुश्किल 40 किलो ही पैदावार होगी।” अच्छी उपजाऊ जमीन होने के बावजूद बारिश के अभाव में फसल बर्बाद हो गई।

​इसी गांव के सुधाकर नवनाथ ठोंबरे ने बताया कि तीन एकड़ सोयाबीन पर ₹54,000 खर्च करने के बाद सिर्फ डेढ़ से दो क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है, जिससे महज 9 से 10 हजार रुपये मिलेंगे। वहीं, बबनराव ठोंबरे के ढाई एकड़ खेत से केवल 60 से 70 किलो उत्पादन मिलने का अनुमान है।

​प्याज, गेंदा और मक्का उत्पादक भी बेहाल

​वैजाला में दल ने प्याज, गेंदा और मक्का किसानों से संवाद किया। प्याज उत्पादक बंकट येडे ने बताया कि पानी की भारी कमी के कारण इस साल प्याज की बुवाई 10 एकड़ से घटाकर सिर्फ एक एकड़ में करनी पड़ी।

​गेंदा उत्पादक पांडुरंग मस्के ने बताया कि बढ़ते तापमान और पानी की कमी से फूलों का आकार बहुत छोटा रह गया है। सूखे के चलते पारंपरिक खेती के साथ-साथ सब्जी और नकदी फूल उत्पादन को भी तगड़ा झटका लगा है।

​चारे का घोर संकट; मवेशियों को बचाने की चुनौती

​पाटोदा तहसील के बेडूकवाड़ी में वैभव शिंदे और अंकुश शिंदे ने पशु चारे की गंभीर समस्या रखी। किसानों ने बताया कि घर का चारा अधिकतम 15 दिनों तक ही चलेगा। बाजार में चारा ₹11,000 प्रति टन बिक रहा है। रोजाना करीब 130 लीटर दूध संकलन करने वाले इन पशुपालकों के लिए इतना महंगा चारा खरीदकर पशुओं को जिंदा रखना नामुमकिन सा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से तत्काल चारा डिपो शुरू करने की मांग की।

​बिंदुसरा बांध में पानी घटकर 5% पर; शहर की जलापूर्ति पर संकट

​खेती के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति का जायजा लेने के लिए दल ने पाली स्थित स्वचालित मौसम केंद्र और बिंदुसरा जलाशय का दौरा किया।

​अधिकारियों ने बताया कि बीड शहर के पास स्थित बिंदुसरा जलाशय में उपयोगी जलस्तर घटकर मात्र 5 प्रतिशत रह गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 100 प्रतिशत भरा हुआ था। बीड शहर को रोजाना 38 एमएलडी पानी की जरूरत होती है, जिसमें से 28 एमएलडी माजलगांव बांध से मिलता है और बाकी बिंदुसरा से लिया जाता है।

​मोरगांव की दराडे बस्ती का रिसाव तालाब   पूरी तरह सूखा पाया गया। गांव के सरपंच लिंबाजी जाधव ने ‘जल जीवन मिशन’ के तहत पेयजल योजना का काम पिछले 4-5 वर्षों से लंबित रहने की शिकायत दर्ज कराई।

​जिल्हाधिकारी कार्यालय में समीक्षा बैठक

​दौरे के बाद बीड कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी डॉ. विवेक जॉनसन ने जिले के सूखे का विस्तृत ब्योरा केंद्रीय दल के समक्ष रखा। बैठक में फसलों के नुकसान, गिरते भूजल स्तर, चारे की उपलब्धता और राहत वितरण की रूपरेखा पर मंथन हुआ। बीड के किसानों ने उम्मीद जताई है कि केंद्रीय दल की इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार जल्द ही बड़े राहत पैकेज की घोषणा करेगी।

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