
जिंतूर,विशेष प्रतिनिधि
येलदरी बांध पर स्थित संकीर्ण एवं जर्जर पुल पर गुरुवार को एक बार फिर भीषण दुर्घटना घटित हुई। रिसोड से पंढरपुर की ओर जा रही राज्य परिवहन निगम (एसटी) की बस को पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित गति के ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना से बस में सवार 46 यात्रियों के प्राण संकट में पड़ गए। चालक की सूझबूझ और तत्परता से एक भयावह अनिष्ट टल गया। हालांकि, इस घटना ने येलदरी बांध के संकटग्रस्त पुल की गंभीर समस्या को पुनः उजागर कर दिया है। नागरिकों ने प्रशासन से अविलंब सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।
विदर्भ और मराठवाड़ा को परस्पर जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग पर स्थित पुल का निर्माण कई दशक पूर्व किया गया था। वर्तमान में यह अत्यंत संकरा और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। चौड़ाई सीमित होने के कारण आमने-सामने से अथवा एक ही दिशा में गुजरने वाले वाहनों के लिए सुरक्षित आवागमन निरंतर चुनौतीपूर्ण बना रहता है। इस मार्ग पर वाहनों के अत्यधिक दबाव के चलते यहां दुर्घटनाओं की आशंका सदैव बनी रहती है।
गुरुवार को रिसोड से पंढरपुर मार्ग पर संचालित एसटी बस (क्रमांक एमएच-14-एमएच-2367) जब येलदरी बांध के पुल से गुजर रही थी, तभी पीछे से द्रुत गति में आ रहे ट्रक (क्रमांक एमएच-17-बीवाय-0642) ने उसे भीषण टक्कर मार दी। इस आघात से पुल पर कुछ समय के लिए भय और अफरा-तफरी का वातावरण निर्मित हो गया। बस चालक ने संयम एवं कौशल का परिचय देते हुए वाहन को नियंत्रित किया, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।
इस पुल पर पूर्व में भी अनेक दुर्घटनाएं घटित हो चुकी हैं। बारंबार होने वाले हादसों के उपरांत भी पुल की स्थायी सुरक्षा का समाधान न निकलने से स्थानीय नागरिकों में तीव्र रोष व्याप्त है। गुरुवार की दुर्घटना में जान-माल की रक्षा भले ही हो गई हो, परंतु भविष्य में ऐसे हादसे अधिक विकराल रूप धारण कर सकते हैं, यह आशंका जताई जा रही है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने येलदरी पुल की समस्या पर तत्काल ठोस निर्णय नहीं लिया, तो व्यापक जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।
तत्काल यातायात विनियमन की मांग
पुल की जर्जर स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासन से तत्काल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। नागरिकों की मांग है कि इस अत्यंत जोखिमपूर्ण पुल पर यातायात का कड़ाई से नियमन किया जाए, वाहनों की गति सीमा निर्धारित हो तथा आवश्यकता पड़ने पर भारी वाहनों के आवागमन हेतु वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए। जब तक नवीन पुल का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक इस मार्ग को सुरक्षित बनाने हेतु ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। किसी बड़ी अनहोनी की प्रतीक्षा करने के बजाय प्रशासन को समय रहते इस विषय को गंभीरता से लेना होगा।