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वझूर हस्तकला पेबल आर्ट गैलरी का हस्तशिल्प सेवा केंद्र के सहायक निदेशक ने किया दौरा; पेबल आर्ट के कार्यों की मुक्तकंठ से की सराहना

​वझूर  पूर्णा, जिला परभणी सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अधीन विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय एवं हस्तशिल्प सेवा केंद्र, छत्रपति संभाजीनगर के सहायक निदेशक श्री अमनकुमार जैन ने वझूर स्थित ‘वझूर हस्तकला – पेबल आर्ट गैलरी’ का सद्भावना दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक कंकड़-पत्थरों से तराशी गई विभिन्न कलाकृतियों का बारीकी से अवलोकन किया तथा पेबल आर्ट के माध्यम से संचालित कलात्मक, शोधपरक एवं हस्तकला विकास से जुड़े कार्यों की विशेष सराहना की।

​इस अवसर पर पेबल आर्ट के मास्टर ट्रेनर तथा दिव्यसृष्टि नेचुरल आर्ट्स प्रा. लि. के निदेशक श्री प्रल्हाद पवार, श्री भगवान पवार, श्रीमती रुक्मिणबाई पवार, श्री बालासाहेब पवार एवं श्री शिवा पवार उपस्थित रहे।

​प्राकृतिक पत्थरों की कला का अनोखा सफर

​श्री प्रल्हाद पवार बचपन से ही पेबल स्टोन यानी प्राकृतिक कंकड़-पत्थरों से जुड़ी हस्तकला का अभ्यास और संवर्धन कर रहे हैं। उन्होंने इस विधा में नए-नए प्रयोग करते हुए प्राकृतिक पत्थरों से बेहद आकर्षक एवं नक्काशीदार कलाकृतियों का सृजन किया है। उनकी इन कलाकृतियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में विशेष स्थान प्राप्त हुआ है तथा इसके लिए वे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं।

​वझूर जैसे ग्रामीण अंचल में स्वयं की पेबल आर्ट गैलरी व प्रदर्शनी केंद्र स्थापित कर उन्होंने पारंपरिक हस्तकला के प्रसार की एक अनूठी पहल शुरू की है। इस केंद्र के माध्यम से कला प्रदर्शनी, प्रशिक्षण, व्यावहारिक कार्यशालाएं, शोध एवं स्थानीय युवाओं को हस्तकला से जोड़ने का कार्य निरंतर जारी है।

​सहायक निदेशक अमनकुमार जैन ने व्यक्त किए विचार

​गैलरी के मुआयने के दौरान सहायक निदेशक श्री अमनकुमार जैन ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए श्री प्रल्हाद पवार के कला के प्रति समर्पण और अनवरत प्रयासों की जमकर प्रशंसा की।

​उन्होंने कहा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रहकर पेबल स्टोन शिल्प में लगातार नए प्रयोग करना, इस कला को बहुआयामी रूप से विकसित करना और खुद का सुव्यवस्थित प्रदर्शनी केंद्र स्थापित करना वास्तव में अत्यंत प्रशंसनीय है। राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में अपनी कृतियां प्रस्तुत कर उन्होंने इस स्थानीय कला को एक व्यापक मंच दिलाया है।

​श्री जैन ने श्री पवार के उज्ज्वल कलात्मक भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

​ग्रामीण हस्तकला विकास को नई दिशा

​इस उच्चस्तरीय दौरे से वझूर में पेबल आर्ट हस्तकला के प्रयासों को नया संबल मिला है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित हस्तकला, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिहाज से इस पहल की महत्ता एक बार फिर रेखांकित हुई है।

​प्रकृति के कंकड़-पत्थरों से जीवंत कलाकृतियां, ग्रामीण प्रतिभा से वैश्विक पहचान और हस्तशिल्प से स्वावलंबन — यही वझूर पेबल आर्ट की प्रेरक यात्रा का मूल मंत्र है।

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