
उद्यमेन कार्यानी सिध्यंति न च मनोरथे। नच सुप्तस्य सिंहस्य मुखे मृग:
पाथरी -विशेष संवाददाता-: खेती पर लगातार मंडराता प्राकृतिक आपदाओं का साया और बाजार में बिचौलियों का शोषण… इस दोहरी मार से अक्सर आम किसान बेबस नजर आता है। लेकिन इसी संकट को अवसर में बदलकर अपनी एक अलग पहचान बनाई है वाघाला के युवा किसान राजेश्वर माणिकराव घुंबरे ने।
तहसील पाथरी के ग्राम वाघाला निवासी राजेश्वर के पास महज डेढ़ एकड़ जमीन है। इसी जमीन पर उसने दिन-रात मेहनत कर केले की फसल तैयार की थी। फसल कटाई के लिए तैयार ही थी कि बाजार में बिचौलियों ने औने-पौने दाम तय कर दिए और रही-सही कसर अचानक आए आंधी-तूफान ने पूरी कर दी, जिससे खड़ी फसल तबाह हो गई। ऐसी स्थिति में कोई भी निराश हो जाता, लेकिन राजेश्वर ने हिम्मत नहीं हारी।
”लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”— इसी जज्बे के साथ उसने लीक से हटकर सोचा। बाजार में नुकसान उठाने के बजाय उसने अपने खेत के केलों पर खुद ही प्रसंस्करण करने का फैसला किया और ‘माउली बनाना वेफर्स’ नाम से एक लघु उद्योग की नींव रखी।
आज दो कुशल कारीगरों के साथ मिलकर वह शुद्ध तेल में, बिना किसी केमिकल या प्रिजर्वेटिव के, पूरी तरह घरेलू पद्धति से कुरकुरे वेफर्स तैयार कर रहा है। इन वेफर्स को वह उचित दरों पर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाता है। बाजार में मिलने वाले मिलावटी उत्पादों की तुलना में उसके प्राकृतिक और स्वादिष्ट वेफर्स की इलाके में भारी मांग है।
कठिन समय में भी परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए राजेश्वर द्वारा किया गया यह प्रयास आज तहसील के तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि एक सफल उद्यमी भी बन सकता है और बिचौलियों के जाल को तोड़ सकता है—यह राजेश्वर ने अपने
काम से साबित कर दिखाया है।
उसकी यह सफलता स्थानीय युवाओं को केवल नौकरी के पीछे भागने के बजाय कृषि-आधारित छोटे उद्योगों की ओर रुख करने का स्पष्ट संदेश दे रही है।