
विशेष संवाददाता
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही हर वर्ग में शोक की लहर दौड़ गई है। एक उत्कृष्ट अभिनेता के रूप में दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर ने अपने सामाजिक कार्यों से भी समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए उनसे लंबे समय से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता ने उनके जाने पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके साथ बिताए पलों और उनके सामाजिक योगदान को याद किया।
गांव के नाले को बनाया ‘नाम नदी’
सहयोगी के अनुसार, नाना की पहल और ‘नाम फाउंडेशन’ के सहयोग से झरी गांव के ‘लेंडी’ नामक बड़े नाले का 40 फीट गहरा, 120 फीट चौड़ा और 9 किलोमीटर लंबा पुनरुद्धार कार्य कराया गया। इस प्रयास से उस नाले ने एक नदी का रूप ले लिया, जिसे बाद में ग्रामीणों ने ‘नाम नदी’ का नाम दिया। इसके अलावा, आत्महत्या कर चुके सैकड़ों किसान परिवारों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके बच्चों का शैक्षणिक अभिभावकत्व स्वीकार कर नाना ने सामाजिक उत्तरदायित्व की एक मिसाल कायम की। बाहर से नारियल की तरह सख्त दिखने वाले नाना भीतर से कितने संवेदनशील थे, इसका प्रमाण उनके इन कार्यों से सदैव मिलता रहा।
जमीन से जुड़े कलाकार और सहज आत्मीयता
सहयोगी ने बताया कि किसान, मजदूर और आम आदमी के लिए जो पीड़ा और तड़प नाना में थी, वह अन्य कलाकारों में कम ही देखने को मिलती है। सिनेमा जगत के शीर्ष मुकाम पर होने के बावजूद उनका व्यवहार एक आम किसान और कार्यकर्ता के प्रति बेहद आत्मीय था। वे उन्हें स्नेह से ‘कांता’ कहकर पुकारते थे। हाल ही में गणेशोत्सव के दौरान पुणे के पास डोणजे स्थित उनके फार्महाउस पर हुई आत्मीय मुलाकात और चर्चाओं को याद करते हुए सहयोगी भावुक हो उठे।
अभिनय और समाज के एक युग का अंत
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं थी; राजनेता हो या सामाजिक कार्यकर्ता, गलत बात पर बेबाक आवाज उठाना उनका स्वभाव था। उनके निधन से सिनेमा और सामाजिक कार्य, दोनों ही क्षेत्रों में एक ऐसी शून्यता पैदा हो गई है जिसे भरना असंभव है। सामाजिक और कृषि क्षेत्र में कार्य करने वालों को संबल देने वाले इस असाधारण व्यक्तित्व और सच्चे ‘नटसम्राट’ के चले जाने से आज पूरा देश स्तब्ध और शोकाकुल है।ऐसी भावना परभणी तहसील के झरी निवासी कृषि भुषण कांतराव देशमुख ने व्यक्त की।
पुणे (विशेष संवाददाता):
यह तस्वीर पुणे जिले के डोणजे स्थित वरिष्ठ अभिनेता व सामाजिक कार्यकर्ता नाना पाटेकर के फार्म हाउस की है।
इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान कृषिभूषण कांतराव काका देशमुख झरीकर के साथ एक प्रतिनिधिमंडल ने नाना पाटेकर के फार्म हाउस पर पहुंचकर उनसे सौहार्दपूर्ण भेंट की थी। इस शिष्टमंडल में शिक्षाधिकारी प्रो. विट्ठल भुसारे, पूर्व विस्तार अधिकारी प्रो. तानाजी भोसले, डॉ. जयंत बोबडे, सुभाष ढगे तथा जाने-माने चित्रकार शिवराज जगताप प्रमुख रूप से उपस्थित थे।