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विश्व पर्यटन दिवस पर वझूर में ‘हेरिटेज वॉक’ का आयोजन; पर्यटन विकास को गति देने के लिए विविध पहल

​वझूर/परभणी 

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर परभणी जिले के पूर्णा तहसील अंतर्गत ऐतिहासिक, प्राचीन और धार्मिक विरासत से समृद्ध ग्राम वझूर में ‘हेरिटेज वॉक’ का भव्य आयोजन किया गया। जिला कलेक्टर कार्यालय, परभणी की ‘ऐतिहासिक एवं प्राचीन विरासत समिति’ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश “विरासत को जानें • विरासत सहेजें • पर्यटन बढ़ाएं” रहा। इस विशेष अभियान में स्थानीय ग्रामीणों, विद्यार्थियों, इतिहास प्रेमियों, पर्यटकों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

​मंदिर की वास्तुकला और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

कार्यक्रम की शुरुआत श्री प्रल्हाद पवार के प्रास्ताविक भाषण से हुई। इस दौरान उपस्थित लोगों को वझूर स्थित प्राचीन श्री रामेश्वर महादेव मंदिर की स्थापत्य कला और संरचना का विस्तृत अध्ययन कराया गया। इतिहास अध्येता प्रा. डॉ. आत्माराम शिंदे (पूर्व इतिहास विभागाध्यक्ष, ज्ञानोपासक महाविद्यालय, परभणी), प्रा. डॉ. नितिन बावळे (इतिहास विभागाध्यक्ष, शारदा महाविद्यालय, परभणी) और डॉ. नीलकंठ कालदाते (मूर्तिशास्त्र एवं वास्तुकला विशेषज्ञ) ने मंदिर के नंदी मंडप, अर्ध मंडप, सभा मंडप, अंतराल, द्वारशाखा, गर्भगृह, छत (वितान) और बाहरी भाग की बारीकियों से अवगत कराया।

​विशेषज्ञों ने मंदिर में मौजूद प्राचीन शिलालेखों का वाचन कर उसका ऐतिहासिक संदर्भ समझाया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण श्रमिकों के आर्थिक सहयोग (दान) से हुआ था। इसके साथ ही प्राचीन भूमिगत बावड़ी, वीरांगना शिल्प, वीरगल, सती प्रस्तर, ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, नक्कारखाना, धर्मशाला, निजामकालीन जिला परिषद स्कूल, जहांगीर कार्यालय, पुरानी हवेलियां और सुरंग मार्ग जैसे पुरातात्विक अवशेषों की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला गया। दल ने वझूर हस्तकला पेबल आर्ट गैलरी और श्री राम मंदिर का भी दौरा किया। कार्यक्रम के अंत में श्री ज्ञानोबा पवार ने आभार व्यक्त किया।

​पर्यटन केंद्र के रूप में वझूर की प्रमुख विशेषताएं

वझूर केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित न होकर पूरे दिन के भ्रमण (एकदिवसीय टूर पैकेज) के लिए एक आदर्श गंतव्य है:

  • ​ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल: कामगारों के दान से निर्मित श्री रामेश्वर महादेव मंदिर, भवानी माता मंदिर, खंडोबा मंदिर, श्री राम मंदिर, विभिन्न देवी-देवताओं के देवालय, संतों के समाधि स्थल और श्री स्वामी मठ।
  • ​पुरातत्वीय धरोहर: भूमिगत बावड़ी, वीरगल, सतीशीला, ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, नक्कारखाना, धर्मशाला, निजामकालीन स्कूल, ऐतिहासिक वाडे (हवेलियां) और गुप्त सुरंगें।
  • ​प्रकृति और साहसिक पर्यटन: गोदावरी नदी का तट, वनभोज की सुविधा, गोदावरी-खड़की नदी संगम, प्राचीन कुंड, मीठे पानी का प्राकृतिक स्रोत (दुरडी कुआं), ट्री हाउस, नौकायन, कृषि पर्यटन और साहसिक खेल।
  • ​कला और सांस्कृतिक विरासत: वझूर हस्तकला गैलरी, पेबल आर्ट, डहाक कला, गोंधल, लोककला, रंगमंच, संगीत-भजन की परंपरा, वारकरी संप्रदाय, ज्योतिष, आयुर्वेदिक औषधालय और ‘ए’ श्रेणी का पुस्तकालय।
  • ​ग्रामीण पर्यटन: पर्यटकों के लिए पैदल अथवा बैलगाड़ी की सवारी से गांव भ्रमण की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही जल्द ही वझूर से जांभूलबेट के बीच जल पर्यटन (बोटिंग) भी शुरू किया जाएगा।

​डिजिटल पहल और अंतरराष्ट्रीय पहचान

गांव की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर लाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। गांव की पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध कराने हेतु क्यूआर (QR) कोड तैयार किया गया है और मंदिर की लाइव आरती का प्रसारण भी शुरू किया गया है। “वझूर ग्राम दर्शन” यूट्यूब चैनल और दस्तावेजीकरण के जरिए यह गांव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है, जिसके चलते मलेशिया जैसे देशों से भी पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।

​प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राम मंदिर संस्थान, वझूर के ह.भ.प. गुरुवर्य पद्माकर महाराज पुराणिक ने की। कार्यक्रम में जिला कलेक्टर श्री संजयसिंह चव्हाण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर तलाठी श्री कोरडे, श्री नरसिंह पवार, राजेभाऊ पवार, मोतीरामजी पवार, बालासाहेब पवार, कल्याण पवार, बाबूराव खुणे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

​मूल स्वरूप सहेजने का आह्वान

विश्व पर्यटन दिवस के इस मंच से वक्ताओं ने अपील करते हुए कहा कि गांव की इस समृद्ध और प्राचीन धरोहर का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। विकास और आधुनिकीकरण की आड़ में इन ऐतिहासिक धरोहरों के मूल स्वरूप और बनावट के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी वास्तविक जड़ों से जुड़ी रह सकें।

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