श्री शिवाजी महाविद्यालय में उपाधि प्रमाणपत्र वितरण समारोह संपन्न
परभणी:
तेजी से बदलते वर्तमान युग में कला, वाणिज्य तथा विज्ञान संकाय के विद्यार्थी यदि पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ कौशलाधारित एवं व्यावसायिक शिक्षा अर्जित करें, तो उन्हें रोजगार के उत्कृष्ट अवसर प्राप्त हो सकते हैं। यह विचार स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. ज्ञानेश्वर पवार ने शनिवार (१ अगस्त) को व्यक्त किए।
वे परभणी स्थित श्री शिवाजी महाविद्यालय में आयोजित उपाधि (डिग्री) प्रमाणपत्र वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. बालासाहेब जाधव ने की। इस अवसर पर महाविद्यालय विकास समिति के प्रमुख हेमंतराव जामकर, आमंत्रित सदस्य इंजीनियर नारायण चौधरी, उपप्राचार्य डॉ. श्रीनिवास केशट्टी, उपप्राचार्य डॉ. रोहिदास नितोंडे, परीक्षा प्रमुख प्रो. मंजिरी भाटे, आईक्यूएसी (IQAC) समन्वयक डॉ. उत्कर्ष किट्टेकर, डॉ. शेषराव राठौड़, डॉ. विजया नांदापुरकर एवं डॉ. एम. एफ. राउत की गरिमामयी उपस्थिति रही।
आगे संबोधित करते हुए डॉ. पवार ने कहा, “आज विश्व की अग्रणी कंपनियों के निदेशक भारतीय युवा हैं, किंतु दूसरी ओर बेरोजगारी भी निरंतर बढ़ रही है। इसलिए पारंपरिक शिक्षा ग्रहण करते समय बाजार में मांग वाले कौशलों का ध्यान रखकर अतिरिक्त पाठ्यक्रम (कोर्स) अवश्य करने चाहिए, जिससे रोजगार सुलभ हो सके।” उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे कार्य के प्रति संकोच त्यागकर किसी भी कार्य को छोटा न समझें। साथ ही, उन्होंने नियमित कक्षाओं में उपस्थित रहकर एक जिम्मेदार नागरिक बनने पर बल दिया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. जाधव ने बताया कि विगत अनेक वर्षों से महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियां ‘कैंपस प्लेसमेंट’ के लिए आ रही हैं, जिससे तीनों संकायों के विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्त हुआ है। उन्होंने युवाओं से कौशल अर्जित कर अपना भविष्य सुरक्षित करने की अपील की।
इस अवसर पर अतिथियों के कर-कमलों द्वारा कला, वाणिज्य, विज्ञान, बीसीए, बीसीएस, एम.एससी., एम.ए. तथा एम.कॉम. के विद्यार्थियों को उपाधि प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। साथ ही, शैक्षणिक वर्ष २०२५-२६ की महाविद्यालयीन वार्षिक पत्रिका ‘शिववाणी’ का विमोचन भी संपन्न हुआ।
मंच पर मेजर डॉ. प्रशांत सराफ, डॉ. तुकाराम फिसफिसे, डॉ. प्रहलाद भोपे तथा डॉ. संतोष कोकिल उपस्थित थे।
कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रो. मंजिरी भाटे ने प्रस्तुत की, मंच संचालन डॉ. जयंत बोबडे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस. एल. राठौड़ द्वारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में रवि कावले, दत्ता पुरणवाड एवं एस. जी. कुरवाडकर ने विशेष योगदान दिया। इस अवसर पर प्राध्यापकगण, प्रशासनिक कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
