परभणी: “हिंदी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता, समृद्ध संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त प्रतीक है। इसमें प्रार्थना, चेतना और संस्कारों का वास है, जो पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है। भारतीय विविधता को एकात्मकता में बांधने और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए हिंदी का महत्व अद्वितीय है। इसलिए छात्रों को अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए दैनिक जीवन में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।” यह विचार प्रो. शिवदास शिंदे ने स्थानीय बाल विद्यामंदिर हाईस्कूल, नानलपेठ में आयोजित ‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे बहुभाषी बनें, हिंदी साहित्य पढ़ें और वैश्विक स्तर पर तेजी से उभर रही इस भाषा के संवर्धन में अपना योगदान दें।
विद्यालय के प्राचार्य अरुण बोराडे की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में पर्यवेक्षक बलीराम कोपरटकर, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रवीण सोनोने और कनिष्ठ महाविद्यालय के प्रा. सिद्धेश्वर हलगे प्रमुख रूप से मंचासीन थे। अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य बोराडे ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने एक प्रेरक कहानी के माध्यम से हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों से संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने के लिए हिंदी के प्रचार-प्रसार की अपील की। 
कक्षा दसवीं (अ) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाने में वर्ग शिक्षक अतुल करमालकर ने विशेष प्रयास किए। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में सारगर्भित भाषण दिए तथा हिंदी साहित्यकारों के योगदान पर आधारित आकर्षक भित्ति-पत्रिकाओं (वॉल पोस्टर्स) का निर्माण किया, जिनका विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों का परिचय प्रवीण सोनोने ने कराया, मंच संचालन छात्रा इफ्रा पठान व नंदिनी काकड़े ने किया तथा आभार प्रदर्शन राधा कतारे ने किया। इस दौरान विद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

