राष्ट्रवादी कांग्रेस को परभणी में बड़ा झटका; शहराध्यक्ष प्रताप देशमुख ने पार्टी को किया अलविदा
प्रथम महापौर सहित सहयोगियों के भी त्यागपत्र; शिवसेना में प्रवेश की चर्चाएं तेज, निर्णय शीघ्र घोषित करेंगे
परभणी —
परभणी के राजनीतिक गलियारे में बड़ी हलचल उत्पन्न करने वाला घटनाक्रम सामने आया है। परभणी नगर निगम के प्रथम महापौर तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष प्रताप (भैया) देशमुख ने अपने पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी त्यागपत्र (राजीनामा) दे दिया है। उनके कुछ प्रमुख सहयोगियों ने भी पार्टी का परित्याग कर दिया है, जिसे राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
विशेष बात यह है कि प्रताप देशमुख को उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का अत्यंत विश्वसनीय और निकटवर्ती नेता माना जाता था। अतः उनके त्यागपत्र से जिले में राष्ट्रवादी कांग्रेस के भीतर बड़ी राजनीतिक चर्चा प्रारंभ हो गई है और पार्टी की संगठनात्मक स्थिति पर भी प्रश्नचिह्न उपस्थित होने लगे हैं।
शिवसेना में प्रवेश की चर्चाएं तेज
त्यागपत्र के उपरांत प्रताप देशमुख द्वारा सांसद संजय जाधव के नेतृत्व में शिवसेना में प्रवेश करने की चर्चाओं ने गति पकड़ ली है। जिले के राजनीतिक क्षेत्रों में इसे लेकर विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं, तथापि प्रताप देशमुख ने अभी तक किसी भी दल में प्रवेश की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
“कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श कर लेंगे निर्णय”
‘लोकसमीक्षा’ से वार्ता करते हुए प्रताप भैया देशमुख ने कहा, “मैंने अपने सहयोगियों सहित राष्ट्रवादी कांग्रेस के सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया है। आगामी राजनीतिक यात्रा के संदर्भ में कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों से विचार-विमर्श चल रहा है। उनकी भावनाओं को जानने के उपरांत उचित समय पर आगामी निर्णय घोषित किया जाएगा।”
राष्ट्रवादी के लिए आत्मचिंतन का समय
परभणी नगर निगम के प्रथम महापौर के रूप में प्रताप देशमुख ने शहर की राजनीति में अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाई थी। शहर में उनका व्यापक जनसंपर्क और कार्यकर्ताओं का सुदृढ़ तंत्र होने के कारण उनके पार्टी छोड़ने का प्रभाव राष्ट्रवादी कांग्रेस के शहरी संगठन पर पड़ने की आशंका राजनीतिक विश्लेषक व्यक्त कर रहे हैं।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संके
प्रताप देशमुख के आगामी राजनीतिक निर्णय पर अब पूरे जिले की दृष्टि टिकी हुई है। यदि वे शिवसेना में प्रवेश करते हैं, तो परभणी के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा परिवर्तन होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा है कि इस निर्णय का प्रभाव आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रमों पर पड़ सकता है।