
विशेष समाचार:
शनिवार, 25 जुलाई 2026 को देवशयनी आषाढ़ी एकादशी है। एकादशी के अवसर पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में व्रत रखते हैं। उपवास के दौरान ‘भगर’ (समा/वरई के चावल) का अत्यधिक सेवन किया जाता है। यदि आप भी उपवास में भगर के व्यंजन बनाने का विचार कर रहे हैं, तो रुकिए… और पहले यह महत्वपूर्ण जानकारी अवश्य पढ़ें।
महाराष्ट्र में भगर के सेवन से खाद्य विषबाधा (फूड पॉइजनिंग) की अनेक घटनाएं निरंतर सामने आ रही हैं। अतः भगर का सेवन करते समय विशेष सावधानी बरतें। मूलतः भगर एक मोटा अनाज (श्री अन्न) है। इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से वरई, सावा, बर्टी एवं कोद्रा जैसे धान का उपयोग किया जाता है।
धान की किस्म के आधार पर ही भगरी के प्रकार निर्धारित होते हैं—जैसे वरई भगरी, सावा भगरी, बर्टी भगरी तथा कोद्रा भगरी। इनमें वरई भगरी को सर्वोत्तम श्रेणी का, जबकि कोद्रा भगर को सबसे निम्न श्रेणी का माना जाता है।
भगर से कार्बोहाइड्रेट और आहार संबंधी फाइबर प्राप्त होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। इसके अतिरिक्त इसमें कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए भी उत्तम आहार है।
पौष्टिक भगर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक क्यों बन रही है?
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा किए गए अध्ययनों से निम्नलिखित कारण उजागर हुए हैं:
- फफूंद का संक्रमण: भगर पर ‘एस्परगिलस टामारी’ प्रजाति की फफूंद (बूरशी) का प्रकोप शीघ्र होता है।
- विषैले तत्त्व: इस फफूंद के कारण फ्यूमिगैक्लेविन और साइक्लोपायाज़ोनिक अम्ल जैसे विषैले पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें एफ़्लाटॉक्सिन एवं एर्गोटॉक्सिन जैसे माइकोटॉक्सिन भी बन सकते हैं।
- अनुकूल वातावरण: 25 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान और हवा में नमी फफूंद की वृद्धि के लिए सबसे अनुकूल स्थिति होती है। ऐसी संक्रमित भगरी का सेवन करने से व्यक्ति खाद्य विषबाधा का शिकार हो जाता है।
भगर का सेवन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:
- पैक्ड सामग्री ही खरीदें: बाजार से भगर लाने के बाद उसे अच्छी तरह साफ करें। केवल सीलबंद (पैकेटबंद) भगर ही खरीदें। बिना ब्रांड या बिना लेबल वाले पैकेट और खुली भगर खरीदने से बचें।
- तिथि अवश्य जांचें: क्रय करते समय पैकेट पर अंकित पैकिंग तिथि और अंतिम उपयोग तिथि (Expiry Date) की जांच अवश्य करें।
- भंडारण में सावधानी: भगर को स्वच्छ, शुष्क स्थान पर और वायुरोधी (एयरटाइट) डिब्बे में रखें, ताकि वायुमण्डलीय नमी से फफूंद न लगे। इसे अधिक दिनों तक संग्रहीत न करें और न ही पुरानी भगरी का सेवन करें।
- रेडीमेड आटा न खरीदें: भगर का आटा बाजार से बना-बनाया न लाएं, क्योंकि आटे में नमी सोखने की क्षमता अधिक होती है, जिससे फफूंद लगने की आशंका बढ़ जाती है।
- ताजा आटा ही पीसें: भगर की रोटी या पूरियों के स्थान पर खिचड़ी को वरीयता दें। यदि आटा आवश्यक हो, तो जरूरत के अनुसार घर पर ही पीसें। मोटा पिसा हुआ आटा प्रयोग करने से बचें।
- सीमित मात्रा में सेवन: भगर और मूंगफली अत्यधिक प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ हैं। लगातार 2-3 दिन उपवास के दौरान इनका अत्यधिक सेवन करने से एसिडिटी, उल्टी, मिचली और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। अपनी पाचन शक्ति के अनुसार ही इनका मर्यादित सेवन करें।
भगर विक्रेताओं के लिए निर्देश:
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- विक्रेता केवल सीलबंद (पैक्ड) भगर की ही बिक्री करें और थोक विक्रेता से क्रय की पक्की रसीद (बिल) अवश्य लें।
- भगर के पैकेट या बोरी पर उत्पादक का पूरा पता, एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस संख्या, पैकिंग तिथि तथा अंतिम तिथि स्पष्ट अंकित होनी चाहिए।
- समयावधि पार (एक्सपायरी) भगर या उसके आटे का विक्रय कदापि न करें। खुली भगर और खुला आटा बिक्री के लिए न रखें।
“उपवास भले ही श्रद्धा और आस्था का विषय हो, किंतु स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। केवल सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और समयावधि के भीतर वाली भगर का ही प्रयोग करें। थोड़ी सी सतर्कता से खाद्य विषबाधा के जोखिम से सहजता से बचा जा सकता है।”
— अनंतकुमार चौधरी, सहायक आयुक्त (खाद्य), खाद्य एवं औषधि प्रशासन