
मुंबई/परभणी:
प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के बल पर परभणी के ग्रामीण परिवेश से निकले ख्यातिप्राप्त चित्रकार सुशील एन. घुंबरे (उर्फ काका) ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अपनी अनूठी कला का परचम लहराया है। ‘कला संवाद’ संस्था के तत्वावधान में मुंबई के ऐतिहासिक ताज कला दीर्घा, द ताजमहल पैलेस (कोलाबा) में चतुर्थ सामूहिक चित्र प्रदर्शनी का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में परभणी की माटी के सपूत सुशील घुंबरे की कृतियों ने वैश्विक स्तर पर सबका ध्यान आकर्षित किया। उनके तूलिका चित्रों में निहित ग्रामीण परिवेश की सुवास, भक्तिभाव और प्रकृति के त्रिवेणी संगम ने कला मर्मज्ञों को अत्यधिक प्रभावित किया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बेलारूस गणराज्य के मुंबई स्थित महावाणिज्य दूत महामहिम अलीकसांद्र मत्सुकोऊ उपस्थित रहे। इसके साथ ही पद्मश्री उदय देशपांडे, पद्मश्री प्रेमजीत बारिया, पद्मश्री अच्युत पालव, जहांगीर आर्ट गैलरी के अध्यक्ष अदी जहांगीर तथा डॉ. विजय कालंत्री सहित कला, उद्योग और प्रशासन जगत की अनेक विशिष्ट विभूतियां उपस्थित थीं। परभणी शहर की पालक मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर महावाणिज्य दूत एवं पद्मश्री से अलंकृत विभूतियों के कर-कमलों द्वारा सुशील घुंबरे को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सीमित संसाधनों के मध्य खेत की मेड़ों से आरंभ हुआ घुंबरे का यह कला-प्रवास आज अंतरराष्ट्रीय क्षितिज तक विस्तृत हो चुका है। दिनभर चली इस प्रदर्शनी में हजारों कलाप्रेमियों ने उनकी कृतियों का अवलोकन किया तथा अनेक गणमान्य नागरिकों ने उनकी कलाकृतियों के निर्माण हेतु अग्रिम आदेश (बुकिंग) भी दिए। “कला धनवानों की नहीं, मन वालों की होती है” के अपने जीवन-मूल्य को चरितार्थ करने वाले चित्रकार घुंबरे की यह उपलब्धि न केवल परभणी, अपितु संपूर्ण मराठवाड़ा के कला जगत के लिए एक गौरवशाली कीर्तिमान है, जो ग्रामीण युवाओं को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करती है।

