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पाथरी साईं बाबा तीर्थक्षेत्र विकास प्रारूप में देरी को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र-

नगर परिषद और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

विधायक विटेकर द्वारा जानकारी–

मुंबई/परभणी –

परभणी जिले के पाथरी स्थित साईं बाबा जन्मस्थान/तीर्थक्षेत्र विकास प्रारूप (मास्टर प्लान) को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हो रही हीलाहवाली का मामला सामने आया है। इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर नगर परिषद और जिलाधिकारी स्तर पर हो रहे विलंब की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है तथा संशोधित प्रस्ताव को शीघ्र मंजूरी देने की मांग की गई है।

₹91.80 करोड़ की योजना, ₹50 करोड़ का फंड जारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाथरी तीर्थक्षेत्र विकास प्रारूप को नियोजन विभाग के 30 नवंबर 2023 के शासनादेश के तहत ₹91.8094 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस विकास योजना के विभिन्न कार्यों के क्रियान्वयन के लिए अब तक लगभग ₹50 करोड़ की निधि भी उपलब्ध कराई जा चुकी है।

समीक्षा बैठक के बाद रुका था काम

इस प्रारूप की प्रगति को लेकर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री (वित्त एवं नियोजन) ने 26 अप्रैल 2025 को परभणी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में समीक्षा बैठक ली थी। बैठक में पंढरपुर, देहू और आलंदी की तर्ज पर पाथरी में भी उच्च स्तरीय निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत मुंबई अथवा पुणे के अनुभवी वास्तुकारों से प्रारूप की जांच कराने और संशोधित प्रस्ताव तैयार होने तक निर्माण कार्य स्थगित रखने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने 5 मई 2025 को नगर परिषद को कार्य स्थगित रखने का पत्र जारी किया था।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रगति पर

जिलाधिकारी द्वारा 22 जून 2026 को दी गई सूचना के मुताबिक, परियोजना हेतु भूमि अधिग्रहण के लिए संयुक्त पैमाइश (जॉइंट मेजरमेंट) पूरी हो चुकी है, जिस पर ₹27.015 लाख खर्च हुए हैं। वर्तमान में उप-विभागीय अधिकारी के माध्यम से भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई प्रगति पर है।

परियोजना में देरी के दो प्रमुख कारण:

  1. तकनीकी तंत्र का अभाव और अक्षमता: नगर परिषद पाथरी में स्थायी मुख्य अधिका

    री और पूर्णकालिक तकनीकी अभियंता (इंजीनियर) की अनुपलब्धता के कारण नगर परिषद प्रशासन तकनीकी दृष्टि से इतने बड़े विकास प्रारूप को संभालने में असमर्थ साबित हो रहा है।

  2. प्रशासनिक शिथिलता और लापरवाही: समीक्षा बैठक के निर्देशों के बाद लंबा समय बीत जाने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन ने आवश्यक कार्रवाई पूरी कर संशोधित प्रारूप जिलाधिकारी को प्रस्तुत नहीं किया। नतीजतन, यह प्रस्ताव शासन स्तर पर मंजूरी के लिए आगे नहीं बढ़ पाया है और अधर में लटका हुआ है।

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