
सिकंदराबाद/नांदेड़:
रेल संरक्षा के प्रति असाधारण सतर्कता, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और सुरक्षित रेल संचालन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नांदेड़ मंडल के चार रेलकर्मियों को जुलाई 2026 माह के लिए ‘एम्प्लॉई ऑफ द मंथ’ (कर्मचारी ऑफ द मंथ) संरक्षा पुरस्कार से नवाजा गया है।
दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री संजय कुमार श्रीवास्तव ने गत सप्ताह सिकंदराबाद स्थित ‘रेल निलयम’ में आयोजित संरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान इन कार्मिकों को सम्मानित किया। यह सम्मान संभावित दुर्घटनाओं को टालने और रेल संचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में फ्रंटलाइन कर्मचारियों की अहम भूमिका की सराहना के रूप में दिया गया है।
नांदेड़ मंडल के पुरस्कृत कर्मचारी:
- श्री गौरव कुमार – ट्रैक मेंटेनर-IV, जवूलका
- श्री मनोज परमानंद – ट्रैक मेंटेनर-IV, बसमत
- श्री सागर लोणारे – वरिष्ठ गुड्स ट्रेन मैनेजर, पूर्णा
- श्री शेख अफरोज एस. के. खजामिया – ट्रैक मेंटेनर-III, भोकर
संभावित हादसों को टालने में निभाई अहम भूमिका:
- ट्रैक की दरार देख तुरंत रोका संचालन: श्री गौरव कुमार ने 19 जुलाई 2026 को भारी बारिश के बीच रात्रि गश्त के दौरान करीब 02:40 बजे अमनवाड़ी-जवूलका खंड (KM 794/11-12) पर रेल पटरी के वेल्ड में दरार (क्रैक) देखी। उन्होंने बिना समय गंवाए दोनों ओर लाल सिग्नल और डेटोनेटर लगाकर ट्रैक को सुरक्षित किया और उच्चाधिकारियों को सूचित किया, जिससे एक बड़ा रेल हादसा टल गया।
- टूटे वेल्ड की सूचना पर तत्काल सुरक्षा उपाय: कार्यवाहक कीमैन श्री मनोज परमानंद ने 20 जुलाई 2026 को सुबह करीब 07:30 बजे बसमत-मालसेलु के बीच (OHE Mast 930/1-2) वेल्ड टूटने की सूचना मिलते ही तत्परता दिखाई। उन्होंने लाल सिग्नल व डेटोनेटर लगाकर ट्रैक को सुरक्षित किया और इंजीनियरिंग टीम के पहुंचने तक मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।
- कोयले की वैगन में लगी आंतरिक आग को भांपा: श्री सागर लोणारे ने 20 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 14:10 बजे पूर्णा स्टेशन पर मालगाड़ी (PSNH/BOXNL) की ड्यूटी के दौरान एक वैगन से असामान्य तपिश और जलने की गंध महसूस की। धुआं या लपटें न दिखने के बावजूद उन्होंने बारीकी से जांच की, जिससे कोयले से लदी वैगन में लगी आंतरिक आग का पता चला। तत्काल अग्निशमन कार्रवाई कर आग बुझाई गई और संभावित बड़ा नुकसान टल गया।
- वेल्डिंग की तकनीकी खामी को समय रहते सुधारा: श्री शेख अफरोज एस. के. खजामिया ने 28 जुलाई 2026 को सुबह लगभग 07:48 बजे कीमैन ड्यूटी के दौरान टर्नआउट संख्या 13B पर वेल्ड में दरार देखी। उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी दी और प्रभावित जोड़ को लकड़ी का सहारा (सपोर्ट) देकर वेल्ड को पूरी तरह टूटने से बचाया। इसके बाद पटरी बदलने व वेल्डिंग का कार्य सकुशल पूरा कराया गया।
नांदेड़ मंडल के इन कर्मचारियों द्वारा प्रदर्शित त्वरित प्रतिक्रिया, सतर्कता और पेशेवर समर्पण रेलवे की सुदृढ़ संरक्षा संस्कृति को दर्शाता है। इस प्रकार का सम्मान अन्य रेलकर्मियों को भी सुरक्षित रेल संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करेगा।


