जिलाधिकारी संजयसिंह चव्हाण के सशक्त नेतृत्व में सेलू-जिंतूर समृद्धि महामार्ग की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को अंततः मिली निर्णायक सफलता

परभणी, 20
पिछले चार वर्षों से लंबित सेलू-जिंतूर समृद्धि महामार्ग की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को जिलाधिकारी संजयसिंह चव्हाण के दृढ़ नेतृत्व में अंततः निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है।
आज तक लगभग 93 प्रतिशत भूमि सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ चुकी है, जिससे इस परियोजना के अगले चरण को व्यापक गति मिली है। 90 प्रतिशत से अधिक भूमि का अधिग्रहण पूर्ण हो जाने के कारण, आगामी कुछ ही दिनों में वास्तविक निर्माण कार्य प्रारंभ होने की प्रबल संभावना है।
ज्ञात हो कि अगस्त से अक्टूबर 2025 के मध्य, सेलू उपविभागीय अधिकारी कार्यालय के समक्ष पूरे 67 दिनों तक अनशन किया गया था। साथ ही, इस प्रकरण को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय में 22 रिट याचिकाएं दायर की गई थीं। इसके आधार पर 15 अक्टूबर 2025 को न्यायालय द्वारा स्थगनादेश (Stay) प्रदान किया गया था।
तत्पश्चात, जिलाधिकारी श्री चव्हाण ने स्वयं मुख्यमंत्री कार्यालय के डॉ. श्रीकर परदेशी से समन्वय स्थापित कर, महाराष्ट्र राज्य के महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठे से सरकार का पक्ष प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने का आग्रह किया। परिणामस्वरूप, 17 फरवरी 2026 को मुंबई उच्च न्यायालय ने 22 में से 20 रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए शासन के दृष्टिकोण की पुष्टि की।
तदनंतर, मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा पुणे रिंग रोड प्रकरण में दिए गए निर्णय के परिप्रेक्ष्य में संबंधित भूमियों का पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) किया गया। जिन भूस्वामियों ने अपनी सहमति नहीं दी थी अथवा भूमि का कब्जा नहीं सौंपा था, उन्हें नियमानुसार अप्रैल माह में भूमि रिक्त करने के नोटिस जारी किए गए। 60 दिनों की समयावधि पूर्ण होने के पश्चात, संबंधित भूस्वामियों की क्षतिपूर्ति (मुआवजा) राशि परभणी जिला न्यायालय में जमा कर वैधानिक रूप से कब्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया आरंभ की गई।
इसी बीच, कुछ भूस्वामियों ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। उस समय भी जिलाधिकारी की पहल पर डॉ. श्रीकर परदेशी के माध्यम से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय में सरकार का पक्ष अत्यंत प्रभावशाली तरीके से रखा। इसके परिणामस्वरूप सर्वोच्च न्यायालय से कोई भी स्थगनादेश (Stay Order) प्राप्त नहीं हुआ।
इस पृष्ठभूमि में, पिछले चार दिनों से अनिवार्य भूमि अधिग्रहण के अंतर्गत वास्तविक कब्जा प्राप्त करने का अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया। जिलाधिकारी ने स्वयं पुलिस अधीक्षक, उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, पुलिस प्रशासन और संबंधित ठेकेदारों को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर इस प्रक्रिया को अविलंब और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करने के आदेश दिए।
माननीय जिलाधिकारी संजयसिंह चव्हाण के कुशल मार्गदर्शन में तहसीलदार शिवाजी मगर, राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और सभी संबंधित एजेंसियों ने उत्कृष्ट समन्वय स्थापित करते हुए, बिना किसी अप्रिय घटना के इस संपूर्ण कार्रवाई को सफलतापूर्वक संपन्न किया।
जिलाधिकारी के सक्षम नेतृत्व और सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप, चार वर्षों से अवरुद्ध सेलू-जिंतूर समृद्धि महामार्ग परियोजना अंततः एक निर्णायक चरण में पहुंच गई है। निश्चित रूप से अब इस क्षेत्र के विकास को एक नई दिशा और गति प्राप्त होगी।

