राज्य

वरिष्ठ समाजवादी विचारक डॉ. कुमार सप्तर्षी का निधन, महाराष्ट्र के सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति

पूर्व विधायक विजयराव गव्हाणे ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि; कहा- 'वे मेरे राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक थे'

परभणी 

​डॉ. कुमार सप्तर्षी (१९४१-२०२६) एक वरिष्ठ भारतीय समाजवादी विचारक, गांधीवादी कार्यकर्ता और पूर्व विधायक थे। उन्होंने १९७० के दशक में पुणे में ‘युवक क्रांति दल’ (युक्रांद) की स्थापना की तथा प्रगतिशील एवं जातिनिरपेक्ष सामाजिक आंदोलनों का पुरजोर समर्थन किया। पेशे से चिकित्सक (मेडिकल डॉक्टर) होने के बावजूद, उन्होंने ‘सत्याग्रही विचारधारा’ नामक पत्रिका का सफलतापूर्वक संपादन किया और सदैव लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा दिया।

​महाराष्ट्र के सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक ताने-बाने को गढ़ने में डॉ. कुमार सप्तर्षी का योगदान अत्यंत अमूल्य रहा है। युवा पीढ़ी में सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों का बीजारोपण करने वाले ‘युवक क्रांति दल’ (युक्रांद) की नींव रखकर, उन्होंने हजारों कार्यकर्ताओं को एक नई वैचारिक दिशा प्रदान की।

व्यक्तिगत एवं वैचारिक सान्निध्य

उनके निधन पर अपनी गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र राज्य पूर्व विधायक समन्वय समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक विजयराव गव्हाणे ने कहा, “मैंने स्वयं उनके साथ ‘युक्रांद’ में महाराष्ट्र के कार्यवाहक के रूप में कार्य किया है। वे केवल एक आंदोलनकारी नेता ही नहीं थे, बल्कि अन्याय के विरुद्ध मुखर होने वाले एक निर्भीक लेखक, गहन विचारक और ओजस्वी वक्ता भी थे। उनके साथ मेरे पारिवारिक एवं अत्यंत आत्मीय संबंध थे। मेरे व्यक्तित्व का निर्माण भी उनके ही प्रभावशाली सान्निध्य में हुआ। इसके साथ ही, वे मेरे राजनीतिक जीवन और संघर्षों के सच्चे गुरु भी थे।”

एक युग का अंत

डॉ. सप्तर्षी के निधन से महाराष्ट्र के समाजवादी और गांधीवादी आंदोलनों में एक ऐसी गहरी रिक्ति (शून्यता) उत्पन्न हो गई है, जिसे भरना असंभव है। प्रगतिशील विचारों का यह सच्चा प्रहरी यद्यपि अब हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं है, तथापि उनके विचार और उनके द्वारा रोपा गया सामाजिक परिवर्तन का पौधा महाराष्ट्र की स्मृतियों में सदैव जीवित रहेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button