विकास कार्य या घटिया निर्माण का खेल? सीसी नाली का सीमेंट हाथों से उखड़ा…!
पूर्णा के रमाई नगर में सीसी रोड व नाली निर्माण की उच्च स्तरीय जांच, काम तत्काल बंद कर गुणवत्ता नियंत्रण विभाग द्वारा जांच की मांग
पूर्णा संवाददाता
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
पूर्णा शहर के प्रभाग क्रमांक ११, रमाई नगर में वर्तमान में चल रहे सीसी (सीमेंट काँक्रीट) रोड और सीसी नाली के निर्माण कार्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले ही नाली पर लगा सीमेंट काँक्रीट हाथों से उखड़ रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में तीव्र आक्रोश व्याप्त है। शासकीय विकास निधि से हो रहे इस कार्य का स्तर अत्यंत निकृष्ट (घटिया) होने का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र राज्य पत्रकार महासंघ द्वारा जिलाधिकारी परभणी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि यह कार्य किस योजना के अंतर्गत स्वीकृत हुआ है, इसके लिए कितनी निधि आवंटित की गई है और किस ठेकेदार को कार्यारंभ आदेश (वर्क ऑर्डर) दिया गया है, इसके विषय में निर्माण स्थल पर कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। शासकीय नियमानुसार विकास कार्य के स्थल पर सूचना पट्ट (इन्फॉर्मेशन बोर्ड) लगाना अनिवार्य है, परंतु इसे बिना लगाए ही काम शुरू रखने से संपूर्ण निर्माण कार्य के प्रति संशय का वातावरण निर्मित हो गया है।
प्रत्यक्ष निरीक्षण और अधिकारियों की उदासीनता
पत्रकार महासंघ द्वारा किए गए प्रत्यक्ष निरीक्षण में यह पाया गया कि सीसी नाली का काँक्रीट हाथों से सहजता से निकल रहा है, कई स्थानों पर दरारें आ गई हैं और निर्माण का स्तर अत्यंत निम्न दर्जे का है। इस प्रकार की अनियमितता से यह गंभीर प्रश्न उपस्थित होता है कि क्या शासकीय निधि का उचित उपयोग हो रहा है? क्या कार्य स्वीकृत प्राकलन (एस्टीमेट) के अनुसार चल रहा है और क्या तकनीकी मानदंडों का पालन किया गया है?
इस घटिया निर्माण के संदर्भ में समाचार चैनलों ने भी समाचार प्रसारित कर वास्तविक स्थिति को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया है। इतनी गंभीर वास्तविकता सामने आने के उपरांत भी संबंधित अधिकारियों द्वारा तत्काल स्थल निरीक्षण कर कार्रवाई न किए जाने पर महाराष्ट्र राज्य पत्रकार महासंघ ने तीव्र अप्रसन्नता एवं नाराजगी व्यक्त की है। महासंघ ने मांग की है कि इस निकृष्ट कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद करवाया जाए और जिला स्तर पर एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय विशेष जांच समिति का गठन किया जाए।
कठोर कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने की मांग
ज्ञापन में आगे मांग की गई है कि महाराष्ट्र शासन के लोक निर्माण विभाग के गुणवत्ता नियंत्रण प्रभाग (Quality Control Division) द्वारा इस निर्माण का कोर कट (Core Cut), काँक्रीट दाबक्षमता परीक्षण (Compressive Strength Test), मोटाई (Thickness)× की जांच की जाए। साथ ही प्रयुक्त सीमेंट, बालू (रेत), गिट्टी व अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता की सघन तकनीकी कड़ाई से जांच हो। यह जांच शिकायतकर्ताओं के समक्ष होनी चाहिए और अंतिम रिपोर्ट आने तक मापन पुस्तिका (Measurement Book) स्वीकृत न कर कोई भी भुगतान न किया जाए।
यदि जांच में कार्य निकृष्ट या प्राकलन के विपरीत पाया जाता है, तो संपूर्ण सीसी रोड व नाली को ध्वस्त कर ठेकेदार के खर्च पर नए सिरे से निर्माण कराया जाए। संबंधित ठेकेदार को काली सूची (ब्लैक लिस्ट) में डाला जाए तथा उत्तरदायी अधिकारियों, अभियंताओं (इंजीनियर्स) व कर्मचारियों पर कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। शासकीय विकास निधि का प्रत्येक रुपया जनहित में खर्च होना चाहिए, अन्यथा शासन व्यवस्था पर नागरिकों का विश्वास डगमगा जाएगा।
मुख्य मांगें: कार्यस्थल पर अनिवार्य सूचना पट्ट गायब; गुणवत्ता नियंत्रण विभाग द्वारा ‘कोर कट’ व ‘दाबक्षमता परीक्षण’ की मांग; दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने तथा संबंधित अभियंताओं पर दंडात्मक कार्रवाई का आग्रह।

