मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के सभी परियोजना प्रभावित नौकरी के लिए पात्र – राजस्व मंत्री बावनकुले के आदेश
विधायक राजेश विटेकर ने किया ध्यानाकर्षन
परभणी
मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय में परियोजना प्रभावितों (प्रोजेक्ट अफेक्टेड) की भर्ती के संबंध में संभाजीनगर के विभागीय आयुक्त द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को स्वीकार करने का निर्णय लिया गया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजना प्रभावित लाभार्थियों को इस भर्ती में पात्र माना जाए। आज आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस बैठक में आपदा प्रबंधन, सहायता एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल, कृषि मंत्री दत्ता मामा भरणे, जिला पालक मंत्री मेघना बोर्डीकर, प्रधान सचिव विकास खारगे, कुलपति इंद्रमणी, विधायक राजेश विटेकर, विधायक रत्नाकर राव गुट्टे, जिलाधिकारी संजय सिंह चव्हाण, शोभा राउत, जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी नतिशा माथुर और सह-सचिव सुनील इंगले सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
परभणी स्थित मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय में परियोजना प्रभावितों की भर्ती के इस संवेदनशील मामले में, विधायक राजेश विटेकर ने पूर्व में कृषि मंत्री दत्तामामा भरणे की उपस्थिति में एक बैठक बुलाई थी। उस बैठक के बाद संभाजीनगर के विभागीय आयुक्त की एक विस्तृत रिपोर्ट सरकार को प्राप्त हुई थी। विधायक राजेश विटेकर और विधायक रत्नाकर राव गुट्टे ने आज की बैठक में पुरजोर मांग की कि इस रिपोर्ट के आधार पर आगामी भर्ती प्रक्रिया में सभी परियोजना प्रभावित लाभार्थियों को उचित न्याय दिया जाए।
बैठक में विधायकों ने पक्ष रखा:
बैठक के दौरान विधायक राजेश विटेकर और विधायक रत्नाकर राव गुट्टे ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्ष 1984 से 2002 के कालखंड में जो भर्तियां की गई थीं, वे विशेष रूप से परियोजना प्रभावितों के आरक्षित पदों के लिए नहीं थीं। उस समय परियोजना प्रभावितों के लिए कोई आधिकारिक विज्ञापन (विज्ञप्ति) भी जारी नहीं किया गया था। केवल दैनिक वेतन भोगी (रोज़ंदारी) के रूप में कार्यरत लोगों में से ही ‘श्रमिक/मजदूर’ के पद पर उनकी आधिकारिक नियुक्ति की गई थी।
उन्होंने आगे बताया कि जिन लोगों को आधिकारिक तौर पर ‘परियोजना प्रभावित प्रमाणपत्र’ जारी नहीं किए गए हैं, उनकी सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) पर केवल “पीएपी” (PAP – प्रोजेक्ट अफेक्टेड पर्सन) की मुहर लगा दी गई है। उनके नाम पर कोई वास्तविक प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है और न ही उनकी मूल नियुक्ति परियोजना प्रभावित कोटे के तहत हुई थी। कृषि विश्वविद्यालय के पास इस “पीएपी” मुहर का कोई वैधानिक या आधिकारिक आधार उपलब्ध नहीं है। तत्कालीन कुलपति और कुलसचिव ने अपनी सुविधानुसार अलग-अलग निर्णय लेकर इस पूरे मामले को एक जटिल कानूनी पेंच में बदल दिया था।
न्यायालय के आदेश और विधिक स्थिति की व्याख्या:
माननीय उच्च न्यायालय संभाजीनगर के आदेशानुसार, किसी भी परियोजना प्रभावित परिवार के एक से अधिक सदस्य को सरकारी नौकरी का लाभ देना विधिक (कानूनी) रूप से उचित नहीं है। परंतु विधायकों ने स्पष्ट किया कि जो लोग वर्तमान में कार्यरत हैं, वे किसी विशेष परियोजना प्रभावित विज्ञापन या आरक्षित भर्ती के माध्यम से नहीं आए हैं। वे केवल स्थानीय क्षेत्र में दैनिक श्रमिक के रूप में कार्य कर रहे थे, इसलिए उपलब्ध जनशक्ति को देखते हुए उन्हें एक साधारण मजदूर के रूप में काम पर रखा गया था, न कि नियमित सेवा के कर्मचारी के रूप में। अतः जिन लोगों के पास प्रमाणपत्र नहीं हैं और वे केवल मजदूर के रूप में नियुक्त हुए थे, उन्हें इस श्रेणी में रखने से माननीय न्यायालय की अवमानना का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 1965 से पहले जब मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण (भूसंपादन) की प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी, तब के शासनादेश (जीआर) के अनुसार ऐसी विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि के मामलों में अधिकतम दो व्यक्तियों को नौकरी में समायोजित किया जा सकता है। चूंकि विश्वविद्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण उसी दौर में हुआ था, इसलिए श्रमिक भर्ती में काम पर रखे गए परिवार के दूसरे सदस्य को भी इस आगामी भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित करना पूरी तरह संभव है। अतः पूर्व में मजदूर के रूप में भर्ती हुए लोगों को ‘परियोजना प्रभावित’ न मानकर केवल ‘श्रमिक’ के रूप में मान्यता दी जाए और जो वास्तव में मूल परियोजना प्रभावित हैं, उन सभी को इस विशेष नौकरी के लिए पात्र घोषित किया जाए।
मंत्रियों का संयुक्त निर्णय:
विधायकों के इन तर्कों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, सहायता एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल और कृषि मंत्री दत्ता मामा भरणे ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया। चूंकि विभागीय आयुक्त द्वारा भेजी गई यह रिपोर्ट जिलाधिकारी, कृषि विश्वविद्यालय और शासन, तीनों पक्षों को पूरी तरह मान्य है, इसलिए इसे सहर्ष स्वीकार किया जा रहा है। मंत्रियों ने तत्काल आदेश जारी किए कि सभी मूल परियोजना प्रभावितों को इस आगामी भर्ती में पूर्णतः पात्र मानकर उन्हें रोजगार का लाभ दिया जाए।
इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही सभी परियोजना प्रभावित लाभार्थियों के लिए शासकीय सेवा में शामिल होने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। आज की इस महत्वपूर्ण बैठक में डॉ. केदार खटिंग, किशोर ढगे, रमेश कदम, मदनराव विटेकर सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
इस निर्णय से वर्षों से लंबित मांग पूरी होने के कारण संपूर्ण परियोजना प्रभावित परिवारों और क्षेत्र में अत्यंत हर्ष का वातावरण है।

