
परभणी:
बाल विद्या विहार विद्यालय में भारतीय चंद्रयान अभियान की ऐतिहासिक सफलता और अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी छात्रों तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक ‘सूचना कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रगति से अवगत कराना था।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक नितिन गोराडकर, पोलाद कंपनी के प्रतिनिधि अनिल सुरडकर तथा सुशील साल्वे विशेष रूप से उपस्थित रहे।
भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की गौरवशाली उपलब्धियों पर केंद्रित इस विशेष कार्यशाला का शुभारंभ पूरे उत्साह के साथ हुआ।
चंद्रयान-1 से चंद्रयान-3 तक की यात्रा पर चर्चा:
कार्यशाला के दौरान वर्ष 2008 में प्रक्षेपित चंद्रयान-1 (जिसने चंद्रमा पर पानी की खोज की), चंद्रयान-2 के तकनीकी अनुभव और 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर द्वारा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर की गई ऐतिहासिक ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की विस्तृत जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने अभियान के पीछे के विज्ञान तथा लैंडर (विक्रम) व रोवर (प्रज्ञान) की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाया। इसके अलावा, छात्रों में विषय के प्रति उत्सुकता बढ़ाने के लिए अभियान से संबंधित वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) और वीडियो भी दिखाए गए।
छात्रों का दिखा जबरदस्त उत्साह:
इस कार्यशाला ने छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को करीब से समझने का सुनहरा अवसर प्रदान किया। उपस्थित छात्रों ने भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने की प्रेरणा मिलने की बात कही।
कार्यक्रम में स्वाति कुलकर्णी, श्रद्धा चौधरी, प्राजक्ता कानडखेडकर, आदित्य शिंदे, नागेश जोशी सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक,गैर शिक्षा कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।
