
परभणी:
“आज का दौर बेहद आपाधापी और कड़ी प्रतिस्पर्धा का है। छात्र जीवन में कदम-कदम पर कई तरह के प्रलोभन सामने आते हैं। इन आकर्षणों से दूर रहकर यदि ईमानदारी से प्रयास किया जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है; लेकिन इसके लिए निरंतरता और सतत प्रयास बेहद आवश्यक हैं।” यह विचार कृषि उपसंचालक आकाश आडे ने व्यक्त किए।
वे स्थानीय शारदा महाविद्यालय में कला, विज्ञान, वाणिज्य, बीसीए और एमए (उर्दू व मनोविज्ञान) प्रथम वर्ष के नवागंतुक विद्यार्थियों के स्वागत समारोह (इंडक्शन प्रोग्राम) को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बबन पवार ने की। मंच पर उप-प्राचार्य डॉ. श्यामसुंदर वाघमारे और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के समन्वयक व कार्यक्रम आयोजक प्रो. डॉ. संतोष नाकाडे उपस्थित थे।
विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए नवनियुक्त कृषि उपसंचालक आकाश आडे ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ प्रतिदिन ध्यान (मेडिटेशन) और सकारात्मक सोच की जरूरत होती है। आज की कड़ी प्रतिस्पर्धा में अपना मुकाम हासिल करने के लिए माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने के साथ-साथ ईमानदारी, कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. बबन पवार ने कहा कि युवा अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर कोई भी मुकाम हासिल कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे जिस भी संकाय का चयन करें, उसमें निपुणता हासिल करें। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन छात्रों को मोबाइल और सोशल मीडिया की लत से बचकर अपने भविष्य निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान नवागंतुक विद्यार्थियों का सभी विभागों, प्राध्यापकों और प्रशासनिक कर्मचारियों से परिचय कराया गया। प्रो. डॉ. संतोष नाकाडे ने छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), क्रेडिट सिस्टम, परीक्षा प्रणाली और महाविद्यालय की विभिन्न कार्यप्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. अविनाश पांचाल ने किया, प्रास्ताविक उप-प्राचार्य डॉ. श्यामसुंदर वाघमारे ने रखा और आभार प्रदर्शन प्रो. डॉ. हनुमंत शेवाले ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र, प्राध्यापक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यालय अधीक्षक प्रकाश काले, विश्वनाथ खेडकर, तुकाराम पवार, संतोष एडके, राजकुमार नागुला, भगवान रिठाड और तनुजा रासवे ने सक्रिय योगदान दिया।