
परभणी:
परभणी जिले में वर्षा के अभाव के कारण खरीफ की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। अतः जिले में अविलंब सूखा घोषित कर किसानों को फसल बीमा योजना का पूर्ण लाभ प्रदान किया जाए। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदा प्रभावित कृषकों को तात्कालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए और लोअर दुधना तथा जायकवाड़ी बांध परियोजनाओं से फसलों के लिए जल छोड़ा जाए। यह मांग विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव विनीता सिंगल से भेंट कर रखी।
परभणी जिले में इस वर्ष अत्यंत न्यून तथा अनियमित वर्षा के कारण कृषकों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। विशेष रूप से जून और जुलाई मास में जिले में मात्र लगभग ६५ मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। अल्पवृष्टि के कारण भूमि में अपेक्षित भूजल स्तर निर्मित नहीं हो सका। तत्पश्चात अगस्त और सितंबर में भी पर्याप्त वर्षा न होने से खरीफ फसलों का संवर्धन बाधित हो गया है तथा उपज में भारी ह्रास की आशंका है। अनेक स्थानों पर प्रखर धूप के कारण फसलें झुलस गई हैं।
इस पृष्ठभूमि में विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने मंगलवार को मंत्रालय में जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे और आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव विनीता सिंगल को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आपदा प्रभावित किसानों को त्वरित आर्थिक सहायता, आवश्यक अकाल राहत सुविधाएं और जिले में तत्काल सूखा घोषित कर फसल बीमा का शत-प्रतिशत लाभ देने का आग्रह किया गया।
लोअर दुधना और जायकवाड़ी से पूर्ण क्षमता के साथ छोड़ा जाए जल
लोअर दुधना परियोजना की नहरों की जल-वहन क्षमता और उपलब्ध जल-नियोजन को दृष्टिगत रखते हुए, यदि ५ मिलियन क्यूबिक मीटर (दशलक्ष घनमीटर) जल छोड़ा जाता है, तो अनुमानतः ३ हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित हो सकती है। इसके अतिरिक्त ५५ एमसीएम जल से एक पूर्ण चक्र (राउंड) संपन्न होता है। अतः परभणी जिले की आवश्यकतानुसार लोअर दुधना परियोजना की नहरों से जल प्रवाह की योजना बनाई जाए।
वर्तमान में जायकवाड़ी बाईं नहर से २०० क्यूसेक जल का निष्कासन हो रहा है। कृषकों की आवश्यकता और अंतिम छोर (टेल) तक जल पहुंचाने के लिए इस प्रवाह को बढ़ाकर 1200 क्यूसेक किया जाना अनिवार्य है। 1200 क्यूसेक जल छोड़ने पर ही सभी किसानों को इसका समुचित लाभ मिल सकेगा। विधायक पाटिल ने इन मांगों को तत्काल कार्यान्वित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया।
इसके साथ ही उन्होंने अवगत कराया कि जायकवाड़ी और लोअर दुधना परियोजना कार्यालयों में 90 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। मात्र 10 प्रतिशत कार्मिकों व अधिकारियों पर अतिरिक्त कार्यभार होने के कारण अनेक कार्य बाधित हैं। अतः जल संसाधन मंत्री विखे पाटिल से इन रिक्त पदों को शीघ्रातिशीघ्र भरने की भी मांग की गई।