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पाथरी उप-पंजीयक कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार की जांच करें; अन्यथा २२ जुलाई से अनिश्चित अनशन की चेतावनी

पाथरी (प्रतिनिधि):

पाथरी स्थित उप-पंजीयक कार्यालय में कथित रूप से भारी भ्रष्टाचार व्याप्त होने तथा कार्यालय के समीप ही एक निजी कक्ष से अनधिकृत रूप से कामकाज संचालित किए जाने का गंभीर आरोप शिवसेना के पाथरी तालुका प्रमुख दिलीप सखाराम हिवाड़े ने लगाया है।

​इस संदर्भ में हिवाड़े ने आज परभणी के जिलाधिकारी को एक लिखित ज्ञापन  सौंपकर संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने इस कथित अनधिकृत कामकाज को तत्काल प्रभाव से बंद करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस मांग पर उचित संज्ञान नहीं लिया गया, तो आगामी २२ जुलाई २०२६ से उप-पंजीयक कार्यालय के समक्ष अनिश्चित अनशन  प्रारंभ कर दिया जाएगा।

‘निजी कक्ष से संचालित हो रहा अनधिकृत कामकाज’ – आरोप

​जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में हिवाड़े ने उल्लेख किया है कि, “उप-पंजीयक कार्यालय के बिल्कुल समीप स्थित एक निजी कक्ष में कंप्यूटर, प्रिंटर व अन्य कार्यालयीन सामग्रियों की व्यवस्था की गई है। वहां इस प्रकार का माहौल बनाया गया है जैसे कि वह कोई अधिकृत शासकीय कार्यालय ही हो।”

​उन्होंने आरोप लगाया कि इस माध्यम से सीधे-साधे नागरिकों, कृषकों (किसानों) तथा विलेख (दस्तावेज) पंजीकरण के लिए आने वाले लोगों का आर्थिक शोषण (लूट) किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कुछ विलेखों के लेन-देन में भारी अनियमितता होने की बात भी उन्होंने कही है। हिवाड़े ने स्पष्ट किया कि, “संबंधित मामलों के साक्ष्य (सबूत) उचित समय पर जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।”

तत्काल कार्रवाई की मांग

​ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि इस संवेदनशील प्रकरण की गहनता से जांच की जाए और दोषी अधिकारियों एवं बिचौलियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही, कार्यालय के निकट चल रहे कथित अनधिकृत कामकाज को अविलंब बंद करवाया जाए।

​इस ज्ञापन की प्रतियां उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ), तहसीलदार, पुलिस निरीक्षक तथा उप-पंजीयक (पाथरी) को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं। इस ज्ञापन पर शिवसेना तालुका प्रमुख दिलीप हिवाड़े के हस्ताक्षर हैं।

​इस पूरे घटनाक्रम के कारण पाथरी में विलेख पंजीकरण (दस्तावेज रजिस्ट्री) प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं। अब इस विषय पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है, इस ओर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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