राज्यशिक्षा

विद्यार्थियों की विविध समस्याओं को लेकर एबीवीपी का ‘तालनाद’ आंदोलन

परभणी उपकेंद्र को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित करें, पारंपरिक पाठ्यक्रमों पर ₹600 इंटरनेट शुल्क समाप्त हो-- एबीवीपी

परभणी: स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय की प्रबंध परिषद की बैठक के अवसर पर विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने हेतु अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), परभणी महानगर इकाई द्वारा विश्वविद्यालय उपकेंद्र पर ‘तालनाद’ आंदोलन किया गया। यह विरोध प्रदर्शन एबीवीपी के प्रदेश सहमंत्री सुशांत एकोर्गे के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

​आंदोलन को संबोधित करते हुए प्रदेश सहमंत्री सुशांत एकोर्गे ने कहा कि परभणी जिला एवं आसपास के क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय उपकेंद्र की स्थापना की गई थी। किंतु, विगत चार वर्षों से यह उपकेंद्र किराए के भवन में संचालित हो रहा है, जिससे विद्यार्थियों को मूलभूत शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रशासन को उपकेंद्र के लिए उपयुक्त भूमि का पुनर्विचार कर शीघ्र अति शीघ्र स्वतंत्र भवन का निर्माण पूर्ण करना चाहिए। साथ ही, पूर्णकालिक निदेशक, आवश्यक अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति कर उपकेंद्र को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित किया जाना चाहिए।

​उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा बीए, बीकॉम एवं बीएससी जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों पर ₹600 का इंटरनेट शुल्क थोपा गया है। वास्तव में इन पाठ्यक्रमों में इंटरनेट अथवा कंप्यूटर प्रयोगशाला का नियमित उपयोग नहीं होता, ऐसे में यह शुल्क वसूलना सर्वथा अन्यायपूर्ण है। बिना सुविधा दिए विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ डालना अनुचित है, अतः इस इंटरनेट शुल्क को तत्काल निरस्त किया जाए।

​एबीवीपी की परभणी महानगर मंत्री गायत्री लाड ने कहा कि ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग के विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु पाठ्यक्रम उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय में संचालित ‘बीए प्रशासनिक सेवाएं’ (B.A. Administrative Services) पाठ्यक्रम को परभणी उपकेंद्र में भी तुरंत आरंभ किया जाना चाहिए, ताकि एमपीएससी, यूपीएससी एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को संबल मिल सके।

​उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालयों में विद्यार्थियों से जिमखाना शुल्क, पुस्तकालय धरोहर राशि (लाइब्रेरी डिपॉजिट) एवं कुलपति कार्यालय कार्यक्रम शुल्क के नाम पर धनराशि ली जा रही है, परंतु प्रत्यक्ष रूप से सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय सभी संबद्ध महाविद्यालयों की जांच कराए और जहां सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां विद्यार्थियों का शुल्क वापस किया जाए तथा भविष्य के लिए ऐसी अनुचित वसूली पर रोक लगाई जाए।

​आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों की मांगों का एक ज्ञापन विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा गया। इसमें मराठा आरक्षण (एसईबीसी) के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को शासकीय शैक्षणिक छूट का लाभ तुरंत प्रदान करने, उपकेंद्र को पूर्ण क्षमता से चलाने तथा अनुचित शुल्कों को समाप्त करने की प्रमुख मांगें शामिल थीं।

​प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मंजीरे (ताल) बजाकर विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये का विरोध किया तथा मांगे पूरी न होने पर तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी। इस अवसर पर विभाग छात्रा प्रमुख सेजल काले, विभाग संयोजक मुक्तेश भंडारे, महानगर सहमंत्री ओंकार डोके, हरीश मोरे सहित बड़ी संख्या में एबीवीपी कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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