
परभणी (विशेष संवाददाता): वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (वनामकृवि), परभणी के मुख्यालय स्थित सभी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय द्वारा ‘कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में उद्यमिता के अवसर’ विषय पर एक विशेष मार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया गया। 6 अक्टूबर 2026 को कृषि महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ व ख्यातिप्राप्त उद्यमिका श्रीमती आशाताई भिसे ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस सत्र में 600 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) इन्द्र मणि ने ऑनलाइन माध्यम से किया। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में शिक्षा निदेशक डॉ. बाबासाहेब ठोंबरे उपस्थित थे। मंच पर अधिष्ठाता डॉ. राजेश क्षीरसागर, डॉ. विश्वनाथ खंदारे, अधिष्ठाता एवं छात्र कल्याण अधिकारी डॉ. राजेश कदम, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. नीता गायकवाड़, प्रभारी अधिष्ठाता डॉ. रघुनाथ जायभाये, विभागाध्यक्ष डॉ. हीराकांत कालपांडे, पुरुषोत्तम नेहरकर और डॉ. सचिन मोरे प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
कुलपति प्रो. (डॉ.) इन्द्र मणि ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के प्रत्यक्ष व अनुभव-आधारित मार्गदर्शन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा उद्यमी श्रीमती आशाताई भिसे का यह व्याख्यान छात्रों को स्वरोजगार और नए उद्यम स्थापित करने की ठोस दिशा प्रदान करेगा।
शिक्षा निदेशक डॉ. बाबासाहेब ठोंबरे ने आशाताई भिसे का परिचय कराते हुए उन्हें एक प्रखर अध्येता, प्रभावी वक्ता और सफल उद्यमी बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर 34वें और महाराष्ट्र में प्रथम स्थान प्राप्त ‘ए’ ग्रेड मान्यता वाले इस विश्वविद्यालय के छात्र आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का लाभ उठाते हुए किसान-केंद्रित उद्यमिता की ओर अग्रसर हों।
‘नाम कमाइए, पैसा अपने-आप पीछे आएगा’ : आशाताई भिसे
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए श्रीमती आशाताई भिसे ने कहा कि दीक्षारंभ से दीक्षांत तक की यात्रा जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है। कृषि प्रधान देश में कृषि शिक्षा चुनना गर्व की बात है; अब छात्रों को कुछ अलग और ठोस कर दिखाने की महत्वाकांक्षा रखनी चाहिए।
अपने संघर्ष को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स में स्नातक होने और बैंक की नौकरी करने के बावजूद उन्होंने इस्तीफा देकर खेती को चुना। उन्होंने कहा, “मराठवाड़ा लगातार सूखे का सामना करता रहा है, लेकिन यहां के किसानों में हर संकट से पार पाने की अदम्य क्षमता है।” महिलाओं को सामाजिक बंधनों का सामना करना पड़ता है, परंतु दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।
उन्होंने जैविक खेती और केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) निर्माण में बांस के प्रयोग से लागत घटाने के अपने नवाचार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि व्यवसाय को शौक नहीं, मिशन बनाएं। किसी भी काम में झिझक न रखें, अपनी गुणवत्ता के दम पर ब्रांड बनाएं।
मार्केटिंग और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “वही बनाएं जो बाजार में बिकता है, और जो बनाएं उसके लिए सही बाजार तैयार करें।” आकर्षक पैकेजिंग, बेहतर संवाद कौशल और आर्थिक अनुशासन पर ध्यान देने की सलाह देते हुए उन्होंने अनावश्यक कर्ज से बचने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने अपनी 10 एकड़ की ड्रैगन फ्रूट खेती की सफलता की कहानी भी साझा की।
कार्यक्रम की प्रस्तावना में अधिष्ठाता डॉ. नीता गायकवाड़ ने आशाताई भिसे के प्रेरणादायी सफर का खाका खींचा। कार्यक्रम का संचालन श्री कैलाश जोंधले ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रभारी शिक्षा अधिकारी डॉ. शंकर पुरी ने किया।
