परभणी
परभणी जिले के अन्नदाताओं के भविष्य को एक नई और आशाजनक दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कार्यक्रम आज संपन्न हुआ। किसानों के सर्वांगीण विकास और कृषि को टिकाऊ व लाभकारी बनाने के उद्देश्य से वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (VNMKV), परभणी और ग्लोबार्क सॉल्यूशंस (Glaubark Solutions) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह गरिमामय कार्यक्रम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति आदरणीय प्रोफेसर डॉ. इंद्र मणि की प्रमुख उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक समझौते की परिकल्पना तैयार करने वाले ग्लोबार्क सॉल्यूशंस के संस्थापक श्री ध्रुव भैया साकोरे-बोर्डीकर तथा सह-संस्थापक श्री वत्सल अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री ध्रुव साकोरे-बोर्डीकर की पहल और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप ही यह महत्वपूर्ण परियोजना परभणी के किसानों के लिए धरातल पर उतर सकी है।
परियोजना के मुख्य उद्देश्य एवं किसानों को लाभ
यह पायलट प्रोजेक्ट मुख्य रूप से ‘कार्बन क्रेडिट्स’ (Carbon Credits) जैसे आधुनिक और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित है। इसके माध्यम से किसानों के जीवन में निम्नलिखित दूरगामी परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखा गया है:
- मृदा स्वास्थ्य संवर्धन: जमीन की गुणवत्ता सुधारकर मिट्टी के स्वास्थ्य (Soil Health) को अधिक सक्षम बनाना।
- कार्बन क्रेडिट्स का सृजन: मिट्टी में जैविक कार्बन (Soil Organic Carbon) का स्तर बढ़ाकर कार्बन क्रेडिट्स तैयार करना, जिससे भविष्य में किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिल सके।
- उर्वरता एवं टिकाऊ उत्पादन: खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाकर फसलों के उत्पादन में निरंतर और स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना।
दोनों संस्थाओ की भूमिका
समझौते के तहत किसानों के हित में दोनों संस्थानों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं:
- कृषि विश्वविद्यालय का योगदान: वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय इस परियोजना के लिए अपना तकनीकी, वैज्ञानिक और बौद्धिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय के माध्यम से किसानों को ‘कार्बन फार्मिंग’ और मृदा संरक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, कपास, सोयाबीन और अन्य प्रमुख फसलों के लिए विश्वविद्यालय के फार्म पर एक ‘प्रदर्शन प्लॉट’ (Demonstration Plot) तैयार किया जाएगा, ताकि किसान आधुनिक तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।
- ग्लोबार्क सॉल्यूशंस का योगदान: ग्लोबार्क सॉल्यूशंस इस पूरी परियोजना की विस्तृत रूपरेखा और मैदानी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगा। कार्बन क्रेडिट्स अर्जित करने के लिए आवश्यक अत्याधुनिक तकनीकी प्रणालियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनी उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा, इस पायलट प्रोजेक्ट के संचालन का समस्त वित्तीय भार भी ग्लोबार्क सॉल्यूशंस द्वारा वहन किया जाएगा।
किसानों से भागीदारी का आह्वान
उपस्थित विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि यह पहल केवल एक दस्तावेजी समझौता नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है। महात्मा गांधी के ‘गाँव की ओर चलो’ और लाल बहादुर शास्त्री के ‘जय जवान, जय किसान’ के नारों को चरितार्थ करते हुए यह कदम किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल खेती के जरिए अतिरिक्त आय का एक मजबूत जरिया देगा।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने जिले के अधिक से अधिक किसानों से इस आधुनिक मुहिम से जुड़ने और अपनी खेती को नए मुकाम पर ले जाने की अपील की।
उपस्थिति:
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. बी. व्ही. आसेवार (निदेशक अनुसंधान), डॉ. बी. व्ही. ठोंबरे (निदेशक शिक्षण), डॉ. आर. डी. अहिरे (निदेशक विस्तार शिक्षा), डॉ. रणजीत चव्हाण (उपनिदेशक अनुसंधान), डॉ. के. टी. जाधव (प्राध्यापक, एकीकृत कृषि प्रणाली), डॉ. हरिहर कोसडीकर (विभागाध्यक्ष, मृदा विज्ञान), डॉ. प्रवीण वैद्य (सहयोगी अधिष्ठाता एवं प्राचार्य, कृषि महाविद्यालय परभणी), डॉ. हिराकांत काळपांडे (विभागाध्यक्ष, कृषि वनस्पति विज्ञान), डॉ. पी. आर. देशमुख (प्राध्यापक, कृषि विस्तार शिक्षा), डॉ. चिंचाणे (कपास विशेषज्ञ, नांदेड़), डॉ. मेघा जगताप (प्रभारी अधिकारी, कपास अनुसंधान केंद्र परभणी), डॉ. अरविंद पांडागळे और डॉ. कैलास डाखोरे उपस्थित थे।
ग्लोबार्क सॉल्यूशंस की ओर से विनायक मोरे (प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर), विराज बोर्डीकर, सुनील खंदारे सहित पूरी टीम मौजूद रही।
संपर्क एवं अधिक जानकारी के लिए:
विनायक मोरे (प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर)
मोबाइल: 9067792364
ग्लोबार्क सॉल्यूशंस / वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी

